जीत के लिए करना होगा संघर्ष, ग्रामीण मतदाताओं पर होगी नजर
कांग्रेस को फूलपुर में जीत दर्ज करने के लिए लंबा संघर्ष करना होगा। साथ ही उन्हें ग्रामीण मतदाताओं को रिझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़नी होगी। इसके लिए कुछ दिनों पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रयागराज में भारत जोड़ो न्याय यात्रा भी की। साथ ही फूलपुर लोकसभा क्षेत्र के मऊआइमा में रात्रि विश्राम कर वरिष्ठ नेताओं से चुनावी रणनीति पर चर्चा की। इस लाेकसभा चुनाव में कांग्रेस का सपा के साथ गठबंधन है। अब देने वाली बात यह है कि फूलपुर सीट पर कौन सी पार्टी दावेदारी करती है।
1991 के बाद नहीं बची जमानत
फूलपुर सीट पर पिछले नौ चुनावों में पार्टी उम्मीदवार मुख्य मुकाबले में भी नहीं रहे। 1991 से 2019 के बीच कुल नौ लोकसभा चुनाव हुए। इनमें पार्टी प्रत्याशी को ढाई से छह फीसदी ही वोट मिले हैं। 2004 में तो मात्र 1.50 प्रतिशत वोट मिले।