हाईकोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी की पेंशन का निर्धारण करने में उसकी तदर्थ या नियमित नियुक्ति मायने नहीं रखती है। कर्मचारी जिस तिथि से नियुक्त हुआ है, उसी तिथि से उसकी पेंशन का निर्धारण किया जाएगा। पहले तदर्थ नियुक्त कर्मचारी के बाद में स्थायी होने पर उसकी पेंशन का निर्धारण स्थायी होने की तिथि से करना गलत है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि स्थायी पद पर तदर्थ नियुक्त कर्मी के नियमित होने के बाद पेंशन निर्धारण करना गलत है। तदर्थ सेवा अवधि नियम 3(8) के तहत क्वालीफाइंग सर्विस मानी जाएगी।
कोर्ट ने तदर्थ सेवा अवधि को सेवानिवृत्ति परिलाभों की गणना में न जोड़ने के आदेश को रद्द कर दिया है और तदर्थ अवधि को शामिल करते हुए पेंशन आदि का तीन माह में निर्धारण करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता और अन्य की याचिका पर दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता राघवेंद्र प्रसाद मिश्र ने बहस की। कहा गया कि याचीगण तदर्थ रूप में होम्योपैथी डॉक्टर नियुक्त हुए। बाद में सेवा नियमित कर ली गई। सेवानिवृत्त के बाद पेंशन आदि के भुगतान में तदर्थ सेवा अवधि नही जोड़ी गई। जब कि नियम है कि स्थायी पद पर नियुक्त तदर्थ कर्मी नियमित हो जाए तो नियुक्ति तिथि से सेवानिवृत्ति परिलाभों का भुगतान किया जाएगा। कोर्ट ने निदेशक होम्योपैथी को याची की सेवा की तदर्थ अवधि को शामिल करते हुए पेंशन और ग्रेच्युटी आदि का भुगतान करने का आदेश दिया है।