फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रयागराज : निरंजनी अखाड़े के महंत रवींद्र पुरी बने अखाड़ा परिषद के नए अध्यक्ष, निर्मल अखाड़ा टूटा

Mon, 25 Oct 2021 08:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की सोमवार को दारागंज निरंजनी अखाड़े में हुई बैठक में महंत रवींद्र पुरी को अखाड़ा परिषद का नया अध्यक्ष चुन लिया गया। सात अखाड़ों ने मिलकर बहुमत से फैसला लिया।
विज्ञापन
Prayagraj News : महंत रवींद्र पुरी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नए अध्यक्ष बनाए गए। - फोटो : prayagraj
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तेरह में से आठ अखाड़ों ने मिलकर सोमवार को प्रयागराज में सर्वसम्मति से मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुन लिया। निरंजनी अखाड़े के सचिव रहे महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालत में मौत के बाद रिक्त हुए अध्यक्ष पद पर लंबी जद्दोजहद और जोड़तोड़ के बाद चुनाव कराया गया। इसी के साथ अखाड़ा परिषद भी अब दो धड़ों में बंट गई है। इससे पहले हरिद्वार में भी सात अखाड़ों ने मिलकर अलग परिषद बनाने हुए नए अध्यक्ष और महामंत्री का एलान किया था। वह कमेटी भी अपनी वैधानिकता का दावा कर रही है।

विज्ञापन


दारागंज स्थित निरंजनी अखाड़े के आश्रम में सोमवार को अखाड़ा परिषद की बैठक पूर्वान्ह 11 बजे आरंभ हुई। इसमें सात अखाड़े शामिल हुए। निर्मल अखाड़े से अलग हुए धड़े के महंत रेशम सिंह को मिलाकर सात की संख्या पूरी की गई। जबकि, वैरागी परंपरा के निर्मोही अनी अखाड़े के मदनमोहन दास का समर्थन पत्र पढ़ा गया। निर्मोही अनी के मदन मोहन दास ने खुद को अध्यक्ष के तौर पर अपना समर्थन पत्र दिया। सबसे पहले दिवंगत अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के चित्र पर माल्यार्पण कर अखाड़ों के प्रतिनिधियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई।



इसके बाद रिक्त हुए अध्यक्ष पद पर चयन के लिए एजेंडा पढ़कर सुनाया गया। अध्यक्ष पद पर मनसा देवी ट्र्स्ट के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से अपनी सहमति प्रदान करते हुए उन्हें परिषद का नया अध्यक्ष चुनने का एलान किया। आठ अखाड़ों की सहमति से रवींद्र पुरी को अखाड़ा परिषद का नया अध्यक्ष चुना गया।

नए अध्यक्ष के तौर पर रवींद्र पुरी के चुने जाने की घोषणा अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने की। परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने बताया कि बहुमत के आधार पर नियम संगत प्रक्रिया का पालन करते हुए परिषद के अध्यक्ष का चुनाव कराया गया है। यही परिषद अब कुंभ, अर्धकुंभ, महाकुंभ का आध्यात्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम कराएगी। इसके अलावा हिंदू संस्कृति के विकास, संरक्षण के साथ ही प्राचीन तीर्थों के उत्थान के लिए अखाड़ा परिषद काम करेगी।
विज्ञापन



अखाड़ों के ये प्रतिनिधि रहे मौजूद

जूना अखाड़ा: सभापति -महंत प्रेम गिरि. महंत नारायण गिरि, महंत महेश पुरी, महंत हरि गिरि
आवाहन अखाड़ा: अध्यक्ष- महंत सत्य गिरि
अग्नि अखाड़ा: महंत मुक्तानंद ब्रह्मचारी, महंत सोमेश्वरानंद ब्रह्मचारी,
महंत विचित्रानंद ब्रह्मचारी
आनंद अखाड़ा: महंत शंकरानंद सरस्वती, महंत गजानंद सरस्वती, महंत रामेश्वरानंद सरस्वती
नया उदासीन अखाड़ा: महंत भगत राम जी, जगतार मुनि
निर्मल अखाडा: अध्यक्ष- महंत रेशम सिंह, महंत प्रेम सिंह
निरंजनी अखाड़ा: महंत ओंकार गिरि, महंत रवींद्र पुरी

अखाड़ा परिषद हिंदू परंपराओं की रक्षा के साथ ही देश और प्रदेश में भाजपा की राष्ट्रवादी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करेगी। साथ ही हम अखाड़ों में एकता स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे, ताकि और बेहतर काम हो सकें। -महंत रवींद्र पुरी, नव निर्वाचित अध्यक्ष- अखाड़ा परिषद


अखाड़ा परिषद का दोबारा चुनाव कराए जाने का कोई मतलब नहीं निकलता। इसलिए कि परिषद का चुनाव हरिद्वार में कराया जा चुका है और महानिर्वाणी अखाड़े के महंत रवींद्र पुरी पहले ही अध्यक्ष चुने जा चुके हैं। महानिर्वाणी के महंत रवींद्र पुरी के नेतृत्व में ही कुंभ मेला अखाड़ा परिषद कराएगी। - महंत राजेंद्र दास, अखाड़ा परिषद के दूसरे धड़े के महामंत्री


अखाड़ा परिषद का दोबारा चुनाव असांविधानिक: देवेंद्र शास्त्री
निर्मल अखाड़े के एक धड़े के अलग होकर अखाड़ा परिषद की प्रयागराज में हुई बैठक में हिस्सा लेने के दावे को महंत देवेंद्र शास्त्री ने गलत ठहराया है। महंत देवेंद्र निर्मल अखाड़े के सचिव हैं और विवाद से पहले अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष थे। उन्होंने देर शाम कहा कि निर्मल अखाड़ा के अध्यक्ष महंत ज्ञान दास हैं। रेशम सिंह और प्रेम सिंह भू माफिया हैं और उनको फर्जी तरीके के निर्मल अखाड़े के प्रतिनिधि के तौर पर खड़ाकर बहुमत दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव असांविधानिक है और इसे मान्यता नहीं दी जा सकती । संत समाज के लोग जानते हैं कि यह पूरी तरह धोखा और परंपरा के साथ छल किया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें