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विधायक राजू पाल : गांव के दबंग से विधायक बनने का सफर, मंत्री के संपर्क में आने पर हुई थी राजनीति में एंट्री

Sat, 30 Mar 2024 11:20 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

साधारण परिवार में जन्मे राजू पाल नाम अक्सर गांव में होने वाले विवाद में आने लगा। छोटे मोटे विवादों का निस्तारण वह अपने घर पर ही कराने लगे। देखेते ही देखते उनकी छवि कुछ समय में क्षेत्र के एक दबंग नेता के रूप में बन गई। 
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बसपा विधायक राजू पाल। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजू पाल का गांव के दबंग लड़के से शहर पश्चिमी सीट का विधायक बनने का सफर सपनों सरीखा था। गांव के छोटे-मोटे झगड़ों के लिए पहचाने जाने वाले राजू की महत्वाकांक्षा ही थी कि देखते ही देखते वह अतीक अहमद के लिए न सिर्फ चुनौती बन बैठे, बल्कि उसे वह शिकस्त दी, जिसके चलते अतीक उन्हें जानी दुश्मन मान बैठा। इस दुश्मनी की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

राजू अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। उनके पिता बांकेलाल मूल रूप से निहालपुर करेली के रहने वाले थे और डेयरी का संचालन करते थे। उसकी मां रानी पाल एएनएम थीं और नींवा की रहने वाली थीं। नौकरी के सिलसिले में रानी मायके में ही रहती थीं और इसीलिए बचपन से ही राजू का लालन-पालन ननिहाल में ही हुआ। माता-पिता की इकलौती संतान होने के कारण और ननिहाल में मिले लाड-प्यार की वजह से ही राजू उग्र स्वभाव के हो गए और दबंगई में उनका मन लगने लगा।

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गांव के युवकों के हर छोटे-बड़े झगड़ों में उनका नाम आने लगा था और धीरे-धीरे उनकी दबंगई के चर्चे गांव से निकलकर आसपास के इलाकों में भी फैलने लगे। कुछ मुकदमे भी दर्ज हुए। करीबी इन्कार करते हैं लेकिन सूत्रों की मानें तो उसकी दबंगई के चर्चे इस कदर आम हुए कि अतीक ने अपने लोगों से खुद बुलवाकर राजू से मुलाकात की थी।

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देखते ही देखते बढ़ता गया वर्चस्व

यह वह दौर था जब राजू का नाम अतीक से भी जुड़ा। देखते ही देखते उनका वर्चस्व बढ़ता चला गया। इसी दौरान वह पड़ोसी जनपद के बसपा के एक कद्दावर नेता के संपर्क में आ गए। 2004 में अतीक के फूलपुर से सांसद चुने जाने के बाद शहर पश्चिमी विधानसभा सीट खाली हो गई। राजू को लगा कि क्यों न अतीक की जगह वह ले लें। उनके कुछ करीबियों ने भी उन्हें चुनाव लड़ने की सलाह दी। हालांकि, यह बात अतीक को ठीक नहीं लगी।

दरअसल, अतीक इस सीट पर अपने भाई अशरफ को चुनाव लड़ाना चाहता था। उसने राजू को चुनाव में उतरने से मना किया। अपने स्वभाव के मुताबिक, राजू मैदान से हटने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने अतीक से साफ कह दिया कि वह चुनाव लड़कर ही रहेेंगे। अतीक को उनकी यह बात बेहद नागवार गुजरी। उधर, राजू पाल ने पड़ोसी जनपद के नेता के जरिये बसपा के बड़े नेताओं से मुलाकात की और चुनाव के लिए दावेदारी पेश की।

इसके बाद टिकट मिल गया और फिर वह हुआ, जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा भी नहीं था। उसने इस सीट पर हुए चुनाव में अशरफ को पांच हजार वोटों से हराकर शहर पश्चिमी क्षेत्र में अतीक की बादशाहत खत्म कर दी। इस तरह से राजू पाल गांव में दबंगई करने वाले एक लड़के से शहर पश्चिमी क्षेत्र का विधायक बन बैठे।

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