शादी के नौ दिन बाद ही हो गई थी पति की हत्या
उसी दिन पड़ोस के निषाद परिवार की एक महिला के बेटे की मछलीबाजार के पास हत्या हो गई थी। वह महिला सुबह करीब 11 बजे घर आई और राजू पाल से मोर्चरी चलने का आग्रह करने लगी। उसका कहना था कि उनकी मौजूदगी होने पर पोस्टमार्टम जल्दी हो जाएगा। उसकी पीड़ा सुनकर राजू पाल मोर्चरी के लिए निकल पड़े थे। पूजा बताती हैं कि दोपहर करीब ढाई बजे राजू का एक करीबी कार्यकर्ता हांफते हुए घर आया। उसने बताया कि विधायक जी को गोली लग गई है। इतना सुनते ही अनहोनी की आशंका से मन व्याकुल हो उठा।
न्यायालय पर पूरा भरोसा था
शादी के सिर्फ नौ दिन ही बीते थे, वह तुरंत घटनास्थल के लिए निकल पड़ीं। सुलेमसराय में फांसी इमली के पास पहुंचीं तो वहां सड़क पर खून बिखरा था। पता चला कि पुलिस उनको लेकर जीवन ज्योति अस्पताल चली गई है। वहां पहुंचने पर बताया गया कि उनको चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया है। पति का चेहरा दिखाने के लिए वह तड़पती, बिलखती रह गईं, लेकिन किसी ने नहीं सुना। शव को वहां से एंबुलेंस के जरिये एसआएन के पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया गया।
पूजा बताती हैं कि हत्यांकाड में शामिल अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ समेत नौ के खिलाफ नामजद तहरीर धूमनगंज थाने में दी, लेकिन पुलिस एफआईआर लिखने में टालमटोल करने लगी। लंबे विरोध-प्रदर्शन व बसपा के तत्कालीन बड़े नेताओं के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर लिखी जा सकी थी। पूजा के मुताबिक उसी दिन उन्होंने पति के हत्यारों को सजा दिलाकर दम लेने का संकल्प लिया था, लेकिन अपराधियों की सत्ता-शासन में मजबूत पकड़ और संरक्षण की वजह से वह लगातार बचते रहे। इस मुकदमे में साथ देने वालों को धमकियां देते रहे। पूजा ने कहा, उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा था कि एक न एक दिन न्याय जरूर मिलेगा।