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महंत नरेंद्र गिरि : बाघंबरी गद्दी मठ में पूरी हुई धूल रोट की रस्म, जानिए किसलिए होती है यह रस्म

Fri, 24 Sep 2021 08:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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Prayagraj : बाघंबरी मठ में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को समाधि दी गई। - फोटो : प्रयागराज
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अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर को भू- समाधि के तीसरे दिन शुक्रवार को धूल-रोट की रस्म में साधु-संतों की आंखों के गम के आंसू छलक पड़े। समाधि स्थल पर धूल-रोट के लिए पहुंचे हर संत के चेहरे पर उदासी और इस घटना को लेकर चिंता के भाव साफ दिख रहे थे। धूल रोट में तेरहों अखाड़ों के प्रतिनिधियों के अलावा देश भर से आए साधु- संतों ने हिस्सा लिया।

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इसके बाद चावल-दाल का भोग लगाकर दिवंगत महंत की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।   महंत नरेंद्र गिरि के समाधि स्थल पर धूल रोट की रस्म दिन के 12 बजे शुरू हुई। संतों, अखाड़ों के प्रतिनिधियों और पंच परमेश्वर की मौजूदगी में बलवीर गिरि ने समाधि पर धूल-रोट की पूजा की। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शंखध्वनि और गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा कर धूल-रोट की आराधना की गई। इस दौरान रोटी में चीनी मिलाकर साधु-संतों को वितरित किया गया। पंचायती निरंजनी अखाड़े के पदाधिकारियों, महंतों, उप महंतों के अलावा तेरहों अखाड़ों के प्रतिनिधियों और अन्य साधु-संतों को रोटी में चीनी मिलाकर बांटी गई।

इसके बाद चावल -दाल का भोग लगाया गया। मठ के भीतर चावल-दाल का भोग लगाकर साधु-संतों ने महंत नरेंद्र गिरि की दिवंगत आत्मा के प्रति मोक्ष की कामना की। इस दौरान मठ परिसर में शांति पाठ भी किया गया। महंत के प्रति मोक्ष की कामना की जाती रही। इसमें निरंजनी अखाड़े के सचिव और हरिद्वार स्थित मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी,रामरतन गिरि और ओंकार गिरि के अलावा पंच परमेश्वरों में राजे गिरि, नरेश गिरि, राधेश्याम पुरी, राकेश पुरी, गंगा गिरि, महंत गौरी शंकर, अंबरीश दास, अवधेश दास, केशव पुरी, राजेंद्र भारती, सुखदेव गिरि, यमुना पुरी समेत सैकड़ों की तादाद में साधु-संत शामिल हुए।
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षोडशी भंडारा पांच अक्तूबर को, नहीं होगा महंतई का पट्टाभिषेक
बाघंबरी गद्दी मठ में महंत नरेंद्र गिरि का षोडशी भंडारा पांच अक्तूबर को होगा। षोडशी भंडारे के इंतजामों के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसमें कई राजनेता, मंत्री, महामंडलेश्वर, पीठाधीश्वर और बड़े संत शामिल हो सकते हैं। षोडशी भंडारे के मौके पर ही महंतई चादर की रस्म भी होनी थी, लेकिन महंत की मौत की सीबीआई जांच तक उत्तराधिकारी के नाम पर निर्णय स्थगित किए जाने की वजह से महंतई चादर की रस्म नहीं होगी। इस रस्म में अखाड़े के महामंडलेश्वर, महंत और उप महंत मिलकर चादर ओढ़ाते हैं। इसे पट्टाभिषेक भी कहा जाता है।

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