सीबीआई ने नरेंद्र गिरि के शिष्य बलवीर पुरी से शनिवार को एक घंटे तक पूछताछ की। सेवादारों से पूछताछ के बाद सीबीआई अधिकारियों ने बलवीर को एक कमरे में बुलाया और एक के बाद एक दर्जनों सवाल किए। दरअसल सुसाइड नोट में नरेंद्र गिरि ने बलवीर को ही उत्तराधिकारी बनाया है। सीबीआई ने बलवीर से आनंद गिरी और नरेंद्र गिरि से संबंधों के बारे में पूछताछ की। उनसे पूछा गया कि घटना का पता उन्हें कैसे चला। वह कब यहां पहुंचे। सीबीआई ने वसीयत के बारे में बलवीर से पूछताछ की। पूछा गया कि जब नरेंद्र गिरि और आनंद गिरि में मनमुटाव हुआ तो उनकी क्या भूमिका थी। बलवीर से हरिद्वार स्थित आश्रम और संचालन के बारे में भी जानकारी ली गई। सीबीआई की टीम ने बंद कमरे में बलवीर से करीब 30 सवाल पूछे। सीबीआई की टीम मठ में करीब तीन घंटे तक रही।
फर्जी है नरेंद्र गिरि का वायरल सुसाइड नोट : शास्त्री
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह शास्त्री ने दावा किया कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट फर्जी है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरि आत्महत्या करने वाले व्यक्ति नहीं थे। उनको हस्ताक्षर करने के लिए साढ़े तीन मिनट से अधिक का समय लगता था। ऐसे में वह इतने पन्नों का सुसाइड नोट कैसे लिख सकते हैं।
शनिवार को हरिद्वार के कनखल स्थित निर्मल अखाड़े में गुरु गोविंद सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे अखाड़ा परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह शास्त्री ने कहा कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की मौत के रहस्य की जांच में सीबीआई जुट गई। सीबीआई रहस्य से पर्दा उठाएगी और आरोपियों को जेल पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि संत आनंद गिरि को फंसाया जा रहा है।
आत्महत्या के समय आनंद गिरि हरिद्वार में था। उन्होंने कहा कि वायरल सुसाइड नोट में जिनका नाम सबसे पहले है उनसे ही पूछताछ होनी चाहिए। हरिद्वार के जिन 18 लोगों के नाम मामले में सामने आ रहे हैं, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। बिल्केश्वर महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर दिगंबर बलवीर पुरी को गद्दी सौंपने के मामले में उन्होंने कहा कि यह निरंजनी अखाड़े का अपना मामला है, इसका निर्णय अखाड़ा खुद लेगा। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के चयन को लेकर बैरागी अखाड़े के अलग होने की बात पर उन्होंने कहा कि इसका भी वह है कोई जवाब नहीं दे सकते।