इस बार पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार को उतार कर बसपा ने यहां दलित, पिछड़ा और मुस्लिम का नया समीकरण बनाने की कोशिश की है। पार्टी के नेता अभिषेक गौतम कहते हैं कि सपा और भाजपा ने सवर्ण उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इसे देखते हुए बसपा का दलित और पिछड़ा का नया समीकरण भाजपा कांग्रेस की नींद उड़ाने वाला है।
इस सीट से पहले सांसद श्रीप्रकाश स्वतंत्रता सेनानी थे और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उनके बाद लाल बहादुर शास्त्री 1957 में यहां से सांसद चुने गए। 1973 में भारतीय क्रांति दल के जनेश्वर मिश्रा को जनता ने चुना। 1984 में अमिताभ बच्चन कांग्रेस की टिकट पर सांसद चुने। 1988 के उपचुनाव में वीपी सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए। 1996, 1998 और 1999 में मुरली मनोहर जोशी ने फतह हासिल की। 2004 और 2009 में सपा के रेवती रमण सिंह यहां लगातार से चुने गए।
2014 में मोदी लहर आई तो यह सीट फिर भाजपा के खाते में चली गई। तब यहां से बीजेपी के श्यामा चरण गुप्ता को 3,13,772 वोट मिले थे। उन्होंने सपा प्रत्याशी रेवती रमण सिंह को 62,009 मतों से हराया था। तब से इस सीट पर कमल ही खिलता रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने भाजपा के टिकट पर 4,94,454 मत पाकर जीत दर्ज की थीं। तब यहां से सपा-बसपा गठबंधन के राजेंद्र सिंह पटेल 310179 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस के योगेश शुक्ला को यहां 31953 वोट मिले थे।
इलाहाबाद संसदीय सीट ने दिए दो प्रधानमंत्री, कई राजनीतिक शख्सियतें भी
इलाहाबाद लोकसभा सीट ने देश को दो प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और वीपी सिंह दिए हैं। बड़ी राजनीतिक शख्सियतों में मुरली मनोहर जोशी, जनेश्वर जैसे दिग्गज यहां से चुनाव जीते। हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे दिग्गज को हराकर अमिताभ बच्चन भी यहां के सांसद रहे।