मामला प्रयागराज जिले (अब कौशाम्बी) के थाना सैनी का है, जो अब कौशांबी जिले की सीमा में है। 35 साल पहले चार जुलाई 1989 को सकीनान कानवार गांव के बृजेंद्र सिंह ने अपने चाचा राजेंद्र सिंह की चुनावी रंजिश में हुई हत्या के आरोप में गांव के ही धीरज सिंह उसके भाई बाबू सिंह, सर्वदानंद उर्फ छुनु और रोशन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी।
इलाहाबाद जिला न्यायालय ने 35 साल पुराने हत्या के मामले में दो सगे भाइयों समेत तीन हत्यारोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अर्थदंड की कुल राशि से दस हजार रुपये का मुआवजा पीड़ित पक्ष को दिए जाने का आदेश भी दिया है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश लक्ष्मी कांत राठौर की अदालत ने बुधवार को सुनाया है।
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मामला प्रयागराज जिले (अब कौशाम्बी) के थाना सैनी का है, जो अब कौशांबी जिले की सीमा में है। 35 साल पहले चार जुलाई 1989 को सकीनान कानवार गांव के बृजेंद्र सिंह ने अपने चाचा राजेंद्र सिंह की चुनावी रंजिश में हुई हत्या के आरोप में गांव के ही धीरज सिंह उसके भाई बाबू सिंह, सर्वदानंद उर्फ छुनु और रोशन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी।
आरोप लगाया था कि वादी के चाचा राजेंद्र सिंह अपने खेत से काम करके घर वापस लौट ही रहे थे कि रास्ते में आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और उन पर जानलेवा हमला कर घायल कर दिया। इलाज के दौरान राजेंद्र सिंह की 5 जुलाई को मौत हो गई। पुलिस ने हत्या की धाराओं में मुकदमा कायम कर आरोपियों की गिरफ्तार किया और हत्या में प्रयुक्त हथियार आदि बरामद किया।
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सभी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल हुआ। विचारण के दौरान रोशन की मौत हो गई, जबकि अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अखिलेश सिंह बिसेन ने आठ गवाहों का बयान कराया। बचाव में आरोपियों ने अपने पक्ष में कोई भी गवाह पेश नहीं कर सके। बुधवार को जिला अदालत ने धीरज सिंह उसके सगे भाई बाबू सिंह और गांव के ही सर्वदानंद उर्फ छुनू को आजीवन कारावास और पच्चीस-पच्चीस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।