धनंजय चोपड़ा ने मुलाकात की यादें की ताजा
‘अमर उजाला’ से बातचीत में सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज के कोर्स कोआर्डिनेटर डॉ.धनंजय चोपड़ा बोले, 1998 में न्यूक्लियर रिपोर्टिंग की ट्रेनिंग के लिए मुंबई जाने पर लता जी से मिलने भी पहुंचा। वह किसी व्यक्तिगत कार्यक्रम में थीं। बड़ी मुश्किल से सामना हुआ तो उन्हें उनके गाए गीत, ‘इलाहाबाद में पैदा हुई’ की याद दिलाते हुए बताया, मैं इलाहाबाद से आया हूं तो मुस्कुराकर इतना ही कहा...काश मैं इलाहाबाद की होती। उस दौर में उनका गाया यह गीत खूब चर्चा में रहा।
इलाहाबाद विवि संगीत विभाग की पूर्व अध्यक्ष एवं मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विवि की पूर्व कुलपति प्रो.स्वतंत्र बाला शर्मा ने कहा, देश की बेटी और संगीत साधिका लता दीदी सरस्वती पूजा के दिन ही अंतिम सांस लेकर अमर हो गईं। 80 के दशक में मुंबई प्रवास के दौरान रिश्ते में मामा संगीतकार रवि के साथ स्टुडियो में रिकॉर्डिंग के दौरान उनके दर्शन और चरण स्पर्श करने का सौभाग्य मिला था। आज भी उनकी वह सौम्य छवि याद है।
कुंभनगरी जाने की जताई थी तमन्ना
स्मृतियां साझा करते हुए गायक कलाकार मनोज गुप्ता बोले, संगीतांजलि परिवार संग कार्यक्रम के सिलसिले में मुंबई जाने पर लता जी मिलने का अवसर मिला था। प्रयागराज से आने की बात सुनकर वह बहुत खुश हुई थीं। मुंबई स्थित अपने आवास प्रभुकुंज पर उन्होंने कहा था, कुंभ नगरी जाने की तमन्ना है। प्रभु की इच्छा होगी तो संगम स्नान के लिए आऊंगी। लेकिन, उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
फिल्म एवं संगीत से जुड़े सर्जन डॉ.नीरज त्रिपाठी कह उठे, यह कैसा संयोग। उनसे मिलने की आस लिए ठीक सात बरस पहले आज ही के दिन, छह फरवरी 2015 को मुंबई में सपरिवार उनके आवास पहुंचा था। साथ थे विविध भारती के उद्घोषक दंपती यूनुस खान और इलाहाबाद की ही ममता सिंह। पर किसी कार्यक्रम में बाहर रहने के कारण भेंट नहीं हो सकी, बस, चरणरज लेकर लौट आया। क्या पता था, छह फरवरी कैसी याद दिला
बोलीं लता, पहले उतारूंगी एक इलाहाबादी की तस्वीर
लताजी के इलाहाबाद प्रेम को साझा करते हुए साहित्यकार पुष्पा भारती की आंखें सजल हो गईं। बोलीं, लता दीदी को फोटोग्राफी का भी गजब का शौक था। जब उन्होंने पोलोराइड कैमरा खरीदा तो पास आकर बोलीं, भाभी, सबसे पहले ‘एक इलाहाबादी’ की तस्वीर उतारूंगी और उनकी उतारी वह तस्वीर आज भी मेरे लिए अनमोल है।