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न्यायमूर्ति गौतम चौधरी बोले : हिंदी में काम करने में कोई बाधा नहीं, सिर्फ इच्छा शक्ति का अभाव

Thu, 19 Sep 2024 09:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने कहा है कि हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए हमें रूढ़ियो को तोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि हिंदी में काम करने में कोई बाधा नहीं है, सिर्फ इच्छा शक्ति का अभाव है। हम गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। आज भी हमारे समाज में अंग्रेजी पढ़ने, बोलने वालों को ज्यादा शिक्षित समझा जाता है, जबकि चीन, जापान जैसे दुनिया के तमाम दूसरे देशों में अपनी भाषा में पढ़ने बोलने को प्राथमिकता दी जाती है।
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प्रयागराज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने कहा है कि हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए हमें रूढ़ियो को तोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि हिंदी में काम करने में कोई बाधा नहीं है, सिर्फ इच्छा शक्ति का अभाव है। हम गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। आज भी हमारे समाज में अंग्रेजी पढ़ने, बोलने वालों को ज्यादा शिक्षित समझा जाता है, जबकि चीन, जापान जैसे दुनिया के तमाम दूसरे देशों में अपनी भाषा में पढ़ने बोलने को प्राथमिकता दी जाती है।

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न्यायमूर्ति चौधरी गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के लाइब्रेरी हाल में भारतीय भाषा अभियान द्वारा जनता को न्याय जनता की भाषा में विषय पर आयोजित संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।हिंदी में अब तक 21 हज़ार से अधिक निर्णय दे चुके न्यायमूर्ति चौधरी ने कहा कि हिंदी को अपनाने के लिए हमने मन से प्रयास नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 50 से 60 प्रतिशत वकील हिंदी में बहस करते हैं। हिंदी में याचिकाएं दाखिल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि  जरूरी नहीं है कि हम कठिन हिंदी का प्रयोग करें लोगों को समझ में आने वाली आसान भाषा का प्रयोग करने की आवश्यकता है।
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मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा हिंदी को लेकर इतने सारे आयोजन हो रहे हैं इससे हमें यह सोचना पड़ता है कि क्या हमें मातृभाषा को भी बचाने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि एक हज़ार वर्षों से हमारी भाषा को नष्ट करने की तमाम कोशिश से हुई, मगर हम इसे  बचाए रखने में सफल रहे हैं। इसलिए हिंदी के विलुप्त होने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में हिंदी के प्रयोग में कोई बाधा नहीं है।

न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने कहा जब भाषा व्यवसाय से जुड़ेगी तभी उसकी उन्नति होगी। उन्होंने कहा कि हमें अंग्रेजी के प्रयोग के लिए बाध्य किया गया तभी हमने इसे सीखा ।इसी प्रकार अगर संस्कृत के प्रयोग की बाध्यता होगी तो हम इसे भी सीखेंगे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा कि दुनिया के बहुत से देश में लोग अंग्रेजी तो जानते हैं, मगर प्रयोग अपनी की भाषा का करते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति पर गर्व करने का पहला चरण है अपनी भाषा का उपयोग करना।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार ने बताया कि 1977 में हिंदी में दाखिल एक याचिका में आए निर्णय के बाद उच्च न्यायालय में हिंदी में बहस करने और याचिकाएं दाखिल करने को मान्यता प्राप्त हुई। भारतीय भाषा अभियान काशी प्रांत के संयोजक अजय कुमार मिश्रा ने सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख पूर्णेंदु मिश्र विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में मौजूद थे। 

हिंदी में काम करने के लिए सम्मानित किए गए 17 अधिवक्ता 

भारतीय भाषा अभियान द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदी में काम करने के लिए अधिवक्ता सर्वेश कुमार मिश्रा, सुधीर कुमार सिंह, सुधीर कुमार श्रीवास्तव, अरविंद कुमार सिंह, विक्रांत नीरज, अनिल कुमार सिंह, रवीश कुमार सिंह, अखिलेश सिंह, राकेश कुमार, साधना सिंह, अमिताभ त्रिपाठी, चंद्रकेश मिश्रा, अग्रसेन कुमार पांडे, प्रशांत सिंह सोम, अरविंद कुमार तिवारी, संजय कुमार पाठक और वीरेंद्र सिंह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

पूरे प्रदेश में चलेगा अभियान अजय 

भारतीय भाषा अभियान काशी प्रांत के संयोजक अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए शिक्षा संस्कृति न्यास द्वारा चलाए जा रहे भारतीय भाषा अभियान को प्रदेश के कोने-कोने में ले जाया जाएगा ताकि न्यायालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा मिले और वादकारियों को उनकी भाषा में न्याय मिल सके।कार्यक्रम में हाईकोर्ट बार के उपाध्यक्ष अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी, सत्येंद्र नाथ तिवारी, सुरेंद्रनाथ मिश्र, मनीष द्विवेदी, प्रदीप कुमार जैसवार, आशुतोष कुमार पांडे, भूपेंद्र कुमार यादव, दिनेश राय सहित दर्जनों अधिवक्ता उपस्थित थे।

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