महाकुंभ के दौरान इस संतों का पट्टभिषेक कर उन्हें सनातन धर्म के प्रचार के साथ ही ऐसे गरीबों को समझा बुझाकर पुन: सनातन संस्कृति से जोड़ने की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी, जिन्हें बहका-फुसलाकर दूसरे धर्मों में शामिल करा दिया गया है।
आदिवासी समाज में शक्तिशाली नेता, अफसर तो हैं ही अन्य उच्च पदों पर भी वह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं, लेकिन वहां गरीब वनवासियों का धर्मांतरण तेजी से हो रहा है। ऐसे में आदिवासी संतों को महामंडलेश्वर बनाकर धर्मांतरण का जवाब देने के लिए तैयार किया जाएगा, ताकि वह अपने समाज को लोगों को समाझा-बुझाकर वापस ला सकें। - महंत हरि गिरि, महामंत्री-अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद।
अनुसूचित जाति के संत को भी जूना अखाड़ा बना चुका है महामंडलेश्वर
इससे पहले जातीय भेदभाव मिटाने और सामाजिक समरसता की भावना बढ़ाने के लिए जूना अखाड़ा अनुसूचित जाति के संत कन्हैया प्रभुनंद गिरि को महामंडलेश्वर बना चुके हैं। कन्हैया प्रभुनंद गिरि भी धर्मांतरण रोकने के साथ ही अनुसूचित और वंचित समाज के संतों को एक मंच पर लाने और सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए अभियान चला रहे हैं।