श्रद्धालुओं को पानी की शुद्धता जांचने के बारे में दी जा रही जानकारी
स्वच्छ सुजल गांव में आने वाले श्रद्धालुओं को वॉटर टेस्टिंग लैब में बताया जा रहा है कि किस तरह से कोई व्यक्ति अपने गांव में पानी की जांच करवा सकता है। स्वच्छ सुजल गांव में स्थापित वॉटर टेस्टिंग लैब के जरिए यहां आने वाले श्रद्धालु ये जान रहे हैं कि पीने योग्य पानी का पीएच लेवल क्या होना चाहिए। पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए। इन सभी बातों की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा श्रद्धालुओं को ये भी बताया जा रहा है कि किस तरह से वो अपने गांव में ही पानी की जांच करवा सकते हैं।
रोजाना 50 से 70 पानी के सैंपल की जांच हो रही है
पानी की शुद्धता के बारे में जानकारी देने के साथ ही प्रयागराज और आसपास के जिलों के लोग पानी भी लेकर आ रहे हैं। जिनकी जांच स्वच्छ सुजल गांव में स्थापित वॉटर टेस्टिंग लैब में की जा रही है। इतना ही नहीं महाकुंभ नगर में स्टॉल लगाने वाली विभिन्न संस्थाएं भी अपने स्टॉलों के पानी का सैंपल लाकर इस लैब में जांच करवा रही हैं। जो भी श्रद्धालु पानी लाता है, उसकी जांच लैब में कार्यरत कर्मचारी करते हैं और पानी की गुणवत्ता के बारे में पूरी जानकारी मुहैया कराते हैं। स्वच्छ सुजल गांव की वॉटर टेस्टिंग लैब में तैनात केमिस्ट धनंजय सिंह बताते हैं कि रोजाना प्रयागराज और आसपास के जिलों से रोजाना 50 से 70 वॉटर सैंपल लाए जा रहे हैं। कभी-कभी ये संख्या ज्यादा भी होती है। वॉटर टेस्टिंग लैब में पानी की 9 मानकों पर जांच की जाती है।