सनातन ही स्थापित कर सकता है विश्व में शांति
इसलिए सिर्फ सनातन संस्कृति में ही वो दम है जो शांति स्थापित कर सकती है। अरब समेत मुस्लिम देशों को यही कहना चाहती हूं कि अगर अपने देश में स्थायी शांति चाहते हैं तो भारत की संस्कृति को अपने यहां लागू करें। सनातन संस्कृति स्वीकार्यता के आधार पर चलता है, नफरत के आधार पर नहीं। नाज़नीन ने कहा कि भारत की संस्कृति में जन्नत जाने का आधार कर्म को बताया गया है। मैं महाकुंभ स्नान करके कर्म अच्छा की हूं, इसलिए मेरे लिए जन्नत का दरवाजा खुला होगा।
भारत मे रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति सांस्कृतिक रूप से सनातनी है ,हिन्दू है। सबकी जाति और गोत्र है। हम सभी को अपने पूर्वजों के नाम, परंपरा, जाति, गोत्र और स्थान के अनुसार जीना चाहिए, तभी हम सम्मान पा सकते हैं। विशाल भारत संस्थान की राष्ट्रीय परिषद सदस्य डॉ. नजमा परवीन ने कहा कि " महाकुंभ में स्नान अपनी संस्कृति का सम्मान है। संगम पर स्नान के बाद समरसता का बोध स्वयं जागृत हो जाता है। न कोई जाति पूछ रहा था, न धर्म, सब बस एक ही उद्देश्य से आए थे स्नान हो जाए और एक रहें। सब एक दूसरे की मदद कर रहे थे।
महाकुंभ में दिखी सनातन की एकता
महाकुंभ नफरत फैलाने वालों के मुंह पर करोड़ों लोगों की एकजुटता है। जो प्रेम ,शांति और समरसता चाहते हैं। हम अरबी ,ईरानी ,तुरानी ,यूनानी, तुर्की की संस्कृति को कभी नहीं मानेंगे और न उससे पहचाने जाएंगे। इसलिए जयकार भारत की महान संस्कृति की और महाकुंभ की। अफरोज पांडेय ने कहा कि हमने पूर्वजों की इच्छा पूरी की है। स्नान के बाद मन पवित्र हो गया। अब तो अपने देश की संस्कृति के लिए ही जीना है।