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एनआईआरएफ रैंकिंग में इलाहाबाद विवि को फिर झटका, देश के टॉप 200 विश्वविद्यालयों में जगह नहीं बना सका

Fri, 12 Jun 2020 01:43 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Allahabad University
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के तहत जारी शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) को तगड़ा झटका दिया। लगातार दूसरे साल इविवि देश के टॉप 200 विश्वविद्यालयों में जगह नहीं बना सका। रैंकिंग में पिछड़ने के पीछे इविवि के शिक्षक संस्थान की बिगड़ती छवि और शिक्षकों की कमी को प्रमुख वजह मान रहे हैं।  

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इविवि की एनआईआरएफ रैंकिंग वर्ष 2016 से शुरू की गई थी। पहली बार इविवि को 65वां स्थान मिला था। वर्ष 2017 में संस्थान ने 95वां स्थान हासिल किया, लेकिन वर्ष 2018 में इविवि टॉप 100 संस्थानों की सूची से भी बाहर निकल गया और उसे 144वां स्थान मिला। वर्ष 2019 की रैंकिंग में इविवि टॉप-200 विश्वविद्यालयों की सूची में भी जगह नहीं बना सका था। इस बार भी हालात नहीं सुधरे और इविवि को देश के टॉप-200 विश्वविद्यालयों में जगह नहीं मिल सकी।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय
इविवि के कुछ शिक्षकों का मानना है कि दो प्रमुख वजहों से संस्थान की रैंकिंग में सुधार नहीं हो पा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से इविवि जिस तरह विवादों में घिरा रहा, उससे समाज के बीच छवि काफी खराब हुई है और जिन श्रेणियों के आधार पर रैंकिंग का निर्धारण किया जाता है, उनमें एक श्रेणी ‘पर्सेप्शन’ की भी होती है।

इसके तहत आम लोगों से भी ई-मेल के माध्यम से संस्थान के प्रति उनकी राय पूछी जाती है। इविवि के पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू हमेशा विवादों में घिरे रहे और इसी वजह से उन्हें इस्तीफा देकर जाना पड़ा। प्रो. हांगलू के बाद किसी स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं हो सकी है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी के साथ इविवि की छवि बिगड़ी है, उसे सुधरने में थोड़ा वक्त लगेगा। 

रैंकिंग बिगडने की दूसरी प्रमुख वजह शिक्षकों की कमी है। इविवि में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। रैंकिंग निर्धारण के वक्त फैकल्टी के बारे में भी देखा जाता है। इविवि में फैकल्टी मेंबर और छात्र अनुपात भी असंतुलित है, जबकि रैंकिंग निर्धारण इसे भी प्रमुखता से देखा जाता है। शिक्षकों की की कमी का प्रभाव पेपर पब्लिकेशन पर भी पड़ता है। ऐसे ही तमाम कारणों से इविवि की रैंकिंग में लगतार गिरावट दर्ज की जा रही है।
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allahabad university
रैंकिंग में सुधार के लिए इविवि ने अपने स्तर से पूरा प्रयास किया था। शिक्षकों की कमी तो रैंकिंग गिरने का प्रमुख कारण है ही, इसके अलावा डाटा समय से तैयार कराना और उसे उपलब्ध कराने की जरूरत भी है। इसे देखते हुए इविवि में कुछ दिनों पहले ही डाटा सेल का गठन किया गया है। सुधार के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि अगले वर्ष रैंकिंग में सुधार आएगा। डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्र, पीआरओ, इविवि 

पांच श्रेणियों के आधार पर हुई रैंकिंग

विवि की रैंकिंग पांच श्रेणियों के आधार पर की गई। पहली श्रेणी है टीएलए यानी टीचिंग लर्निंग एंड रिसोर्सेज, दूसरी  श्रेणी आरपीसी (रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिस), तीसरी श्रेणी जीओ (ग्रेजुएट आउटकम), चौथी श्रेणी ओआई (आउटरीच एंड इंक्यूसिविटी) और पांचवीं श्रेणी पीआर (पर्सेप्श्न)। टीएलए के तहत देखा जाता है छात्र कितने हैं, छात्रों और फैकेल्टी मेंबर्स का क्या अनुपात है, कितना बजट मिला और कितना खर्च हुआ। आरपीसी के तहत कितने शोध पत्र प्रकाशित हुए, कितने पेंटेंट हुए, कितने ग्रांटेड हैं।

जीओ श्रेणी के तहत समीक्षा की जाती है कि ग्रेजुएट आउटकम क्या है, यानी विवि के कितने छात्रों को प्लेसमेंट मिला। पीएचडी छात्रों की भी समीक्षा होती है। वहीं, ओआई श्रेणी के तहत दूसरे राज्यों एवं देशों के छात्रों की उपस्थिति का प्रतिशत, शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों के लिए फैकेल्टी, विवि में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर छात्रों की स्थिति और महिला प्रतिशत की समीक्षा होती है। वहीं, पर्सेप्शन के तहत आम लोगों, शिक्षकों, छात्रों की ओर से विवि के प्रति की गई ऑनलाइन टिप्प्णी की समीक्षा की जाती है।
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