इविवि के कुछ शिक्षकों का मानना है कि दो प्रमुख वजहों से संस्थान की रैंकिंग में सुधार नहीं हो पा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से इविवि जिस तरह विवादों में घिरा रहा, उससे समाज के बीच छवि काफी खराब हुई है और जिन श्रेणियों के आधार पर रैंकिंग का निर्धारण किया जाता है, उनमें एक श्रेणी ‘पर्सेप्शन’ की भी होती है।
इसके तहत आम लोगों से भी ई-मेल के माध्यम से संस्थान के प्रति उनकी राय पूछी जाती है। इविवि के पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू हमेशा विवादों में घिरे रहे और इसी वजह से उन्हें इस्तीफा देकर जाना पड़ा। प्रो. हांगलू के बाद किसी स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं हो सकी है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी के साथ इविवि की छवि बिगड़ी है, उसे सुधरने में थोड़ा वक्त लगेगा।
रैंकिंग बिगडने की दूसरी प्रमुख वजह शिक्षकों की कमी है। इविवि में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। रैंकिंग निर्धारण के वक्त फैकल्टी के बारे में भी देखा जाता है। इविवि में फैकल्टी मेंबर और छात्र अनुपात भी असंतुलित है, जबकि रैंकिंग निर्धारण इसे भी प्रमुखता से देखा जाता है। शिक्षकों की की कमी का प्रभाव पेपर पब्लिकेशन पर भी पड़ता है। ऐसे ही तमाम कारणों से इविवि की रैंकिंग में लगतार गिरावट दर्ज की जा रही है।
रैंकिंग में सुधार के लिए इविवि ने अपने स्तर से पूरा प्रयास किया था। शिक्षकों की कमी तो रैंकिंग गिरने का प्रमुख कारण है ही, इसके अलावा डाटा समय से तैयार कराना और उसे उपलब्ध कराने की जरूरत भी है। इसे देखते हुए इविवि में कुछ दिनों पहले ही डाटा सेल का गठन किया गया है। सुधार के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि अगले वर्ष रैंकिंग में सुधार आएगा। डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्र, पीआरओ, इविवि
पांच श्रेणियों के आधार पर हुई रैंकिंग
विवि की रैंकिंग पांच श्रेणियों के आधार पर की गई। पहली श्रेणी है टीएलए यानी टीचिंग लर्निंग एंड रिसोर्सेज, दूसरी श्रेणी आरपीसी (रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिस), तीसरी श्रेणी जीओ (ग्रेजुएट आउटकम), चौथी श्रेणी ओआई (आउटरीच एंड इंक्यूसिविटी) और पांचवीं श्रेणी पीआर (पर्सेप्श्न)। टीएलए के तहत देखा जाता है छात्र कितने हैं, छात्रों और फैकेल्टी मेंबर्स का क्या अनुपात है, कितना बजट मिला और कितना खर्च हुआ। आरपीसी के तहत कितने शोध पत्र प्रकाशित हुए, कितने पेंटेंट हुए, कितने ग्रांटेड हैं।
जीओ श्रेणी के तहत समीक्षा की जाती है कि ग्रेजुएट आउटकम क्या है, यानी विवि के कितने छात्रों को प्लेसमेंट मिला। पीएचडी छात्रों की भी समीक्षा होती है। वहीं, ओआई श्रेणी के तहत दूसरे राज्यों एवं देशों के छात्रों की उपस्थिति का प्रतिशत, शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों के लिए फैकेल्टी, विवि में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर छात्रों की स्थिति और महिला प्रतिशत की समीक्षा होती है। वहीं, पर्सेप्शन के तहत आम लोगों, शिक्षकों, छात्रों की ओर से विवि के प्रति की गई ऑनलाइन टिप्प्णी की समीक्षा की जाती है।