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लुभाती रही ‘फागुनी बयार’

Sun, 27 Mar 2016 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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फागुनी बयार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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‘स्वर्ग’ रंगमंडल की ओर से शनिवार को सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में ‘फागुनी बयार’ की रंगारंग प्रस्तुतियों के बीच लोक रंग में रचे बसे गीत एवं नृत्यों ने फागुन की मस्ती में सभी को सराबोर किया। शुरुआत देवी गीत निमिया के डारि मइया से हुई। उसके बाद रघुबर संग जाब, अब ना अवध मा रहिबै, एहि झुलनी की छइयां बलम, दुपहरिया बीताला हो, आज बिरज में होरी रे सखि,  नंदलाला मारे जाए, केसर के फुलवा, फाग खेले गोपी संग होरी कन्हैया, आज बिरज में होली है रे रसिया , चढ़ले फागुन के हो महिनवा, हरि मोर जोगिया भइले न सुनाकर शांति ने वाहवाही बटोरी। 
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इस दौरान मुख्य अतिथि हरिराम सहित विशिष्ट अतिथि अतुल द्विवेदी, डा.अनुपम आनंद, रामगोपाल गुप्त, धनंजय चोपड़ा, लल्लन सिंह गहमरी, श्लेष गौतम को लोककला सम्मान से नवाजा गया। मुख्य अतिथि हरिराम गौतम ने लोककलाओं के संरक्षण के लिए संस्था की सराहना की। डा.अनुपम आनंद ने ने कहा, प्रोत्साहन का ही फल है कि लोककलाकारों को नई ऊर्जा मिली है। संचालन डा.श्लेष गौतम ने किया। धर्मेश दीक्षित, प्रिया मिश्रा, सोनम सेठ, शिल्पी मोहिले, नीरज अग्रवाल, शुभम श्रीवास्तव, अमित भारती, बसंत लाल त्यागी ने लोक गीत और सोनाली चक्रवर्ती, सुजाता केसरी, शालिनी श्रीवास्तव, धीरज अग्रवाल, सचिन केसरवानी आदि ने लोकनृत्यों की प्रस्तुति से समा बांधा। 

मनोज के गीतों ने बांधा समां
पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक मनोज गुप्ता ने होली गीत सुनाए। उन्होंने गणेश वंदना से शुरूआत की। उसके बाद रंग डारो नहीं कृष्ण मुरारी, लरजते गम बढ़ा दीजिए, होलिया में उड़े गुलाल, मुसीबत में शरीफों की शराफत कम नहीं होती , आज न छोड़ेगे बस हमजोली सुनाकर वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम में पुलिस के अधिकारी उपस्थित रहे।
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