याची की दलील है कि शहर के गंदे पानी का प्रयोग ताप सयंत्रों, सिंचाई और भवन निर्माण में किया जा सकता है। इससे नदियों का भू जल स्तर तो बढ़ेगा ही साथ ही नदियों को प्रदूषण से भी बचाया जा सकेगा। याची ने याचिका में यह भी कहा है कि गंगा और यमुना के जल स्तर और शुद्धता को न रोका गया तो कुंभ जैसे धार्मिक आयोजन भी निरर्थक साबित होंगे।
गंगा जमुना के पानी दोहन के चलते लगातार गिर रहे भू जल स्तर से चिंतित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। एनजीटी ने पूछा है कि गंगा जमुना के गिरते जल स्तर रोकने के लिए उसके पास क्या योजना है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने प्रयागराज के समाजसेवी कमलेश सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची कमलेश सिंह का कहना है कि विद्युत ताप संयंत्रों की ओर से यमुना नदी के जल का दोहन किया जा रहा है और शहर के गंदे पानी को नदियों में गिराया जा रहा है। इसके चलते लगतार नदियों ने प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है साथ ही गंगा और यमुना नदी का भू जल स्तर गिर भी रहा है। परिणामतः अनवरत सूखती गंगा और यमुना का मिलाप प्रभावित हो रहा है।
याची की दलील है कि शहर के गंदे पानी का प्रयोग ताप सयंत्रों, सिंचाई और भवन निर्माण में किया जा सकता है। इससे नदियों का भू जल स्तर तो बढ़ेगा ही साथ ही नदियों को प्रदूषण से भी बचाया जा सकेगा। याची ने याचिका में यह भी कहा है कि गंगा और यमुना के जल स्तर और शुद्धता को न रोका गया तो कुंभ जैसे धार्मिक आयोजन भी निरर्थक साबित होंगे।
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याची दलीलों पर गंभीर एनजीटी ने भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय पर्यावरण , वन, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग केंद्रीय जल आयुक्त को याचिका में पक्षकार बनाते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने लगातार गिरते भू जल स्तर और गंदे पानी को यमुना नदी में गिराए जाने पर जवाब तलब करते हुए पूछा है कि गंगा -यमुना के जल दोहन को रोकने की सरकार के पास क्या योजना है। मामले की अगली सुनवाई आठ अप्रैल को होगी।