अधिवक्ता ने उच्च न्यायिक सेवा की वैधता को दी थी चुनौती
याची अधिवक्ता संदीप मित्तल ने याचिका में उच्च न्यायिक सेवा परीक्षा 2020 की वैधता को चुनौती दी थी। याची ने 18 फरवरी 2021 को इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था। प्रत्यावेदन देकर बतौर ईडब्ल्यूएस सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में लाभ लेने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने जब उनके प्रत्यावेदन पर विचार नहीं किया तो उन्होंने याचिका दायर की।
उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि उन्हें ईडब्ल्यूएस को मिलने वाले 10 फीसदी आरक्षण का लाभ देते हुए इस परीक्षा में बैठने की इजाजत दी जाए। इसके लिए भारतीय संविधान में हुए 103वें संशोधन का हवाला भी दिया गया। संशोधन में ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
यूपी सरकार ने भी इस बारे में जरूरी संशोधन कर ऐसे अभ्यर्थियों को 10 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया है। कोर्ट ने याची की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। मगर कहा कि हाईकोर्ट प्रशासन ने अभी तक इस नियम को स्वीकार नहीं किया है। उससे अनुरोध है कि वह आगे इस प्रावधान को स्वीकार करें।