कोर्ट ने हर्जाना राशि प्रयागराज के टैगोर टाउन मोहल्ले में एलआईसी कॉलोनी में स्थित तारा संस्था के संस्थान रवींद्र नाथ गौर आनंद ओल्ड एज होम के बैंक खाते में जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याची को तीन हफ्ते में हर्जाना महानिबंधक के समक्ष जमा करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि जमा न करने पर डीएम शामली राजस्व वसूली कर एक माह में जमा कराएं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जो कोई व्यक्ति दागी हाथ लेकर न्याय की मांग करने आता है, उसे कोई राहत पाने का अधिकार नहीं है। तथ्य छिपाकर याचिका दायर करने वाला वस्तुत: कोर्ट से फ्रॉड करता है। इसी के साथ कोर्ट ने व्यक्तिगत विवाद में उलझे याची की ओर से अदालत में लंबित शत्रु संपत्ति से विपक्षियों की बेदखली की मांग में दाखिल जनहित याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया है। साथ ही याची पर 50 हजार रुपये हर्जाना लगाते हुए याचिका खारिज कर दी है।
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कोर्ट ने हर्जाना राशि प्रयागराज के टैगोर टाउन मोहल्ले में एलआईसी कॉलोनी में स्थित तारा संस्था के संस्थान रवींद्र नाथ गौर आनंद ओल्ड एज होम के बैंक खाते में जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याची को तीन हफ्ते में हर्जाना महानिबंधक के समक्ष जमा करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि जमा न करने पर डीएम शामली राजस्व वसूली कर एक माह में जमा कराएं।
यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने गांव कालान, कैराना, शामली के निवासी अकबर अब्बास जैदी की जनहित याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि वह सोसल वर्कर है। गांव कैराना के प्लॉट संख्या 24 जो शत्रु संपत्ति घोषित है।
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विपक्षियों ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर बताया कि याची और वे एक फर्म के भागीदार थे और कथित शत्रु संपत्ति उनकी है। सहायक कलेक्टर ने उनके स्वामित्व के दावे को खारिज कर दिया था। अपर आयुक्त मेरठ ने अपील मंजूर करते हुए जमीन के 1/5 हिस्से पर उनका हक माना। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू में दाखिल द्वितीय अपील रिमांड कर दी गई। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जो लंबित है। जमीन पर दूकानें बनी हैं। याची व विपक्षियों में फर्म की भागीदारी थी, जिसको लेकर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए यह जनहित याचिका दायर की गई है।