पांच साल बाद कोर्ट के कड़े रुख पर याची को सेवा में बहाल किया गया। मगर, परिलाभों का भुगतान नहीं किया गया। कोर्ट ने मुख्य सुरक्षा आयुक्त के खिलाफ अवमानना आरोप निर्मित कर कारण बताओ नोटिस दी कि क्यों न आदेश की अवहेलना करने पर सजा सुनाई जाए।
इसके बाद हलफनामा दाखिल कर कहा कि पूरा भुगतान कर दिया गया है। जिस पर याची अधिवक्ता ने आपत्ति की और कहा कि केवल बकाया वेतन व डियरनेस भत्ते का ही भुगतान किया गया है। आवास किराया और डीए का भुगतान नहीं किया गया है। जो आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं है।
एएसजीआई शशि प्रकाश सिंह ने नियमावली के हवाले से कहा कि जितने का हक था, भुगतान कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या किराया और डीए सेवा जनित परिलाभों में शामिल नहीं है। और क्या किसी नियम से बहाल कर्मचारी को भुगतान करने पर रोक लगी है। नियमावली में इन भत्तों को अलग नहीं किया गया है। भुगतान करने में कोई अवरोध भी नहीं है। यह नहीं है कि बर्खास्तगी से बहाल कर्मी आवास किराया और डीए का हकदार नहीं है। इसलिए भुगतान न करना आदेश की अवहेलना करना है।