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अभियोजन की कमजोर पैरवी से अभियुक्तों को मिल रही जमानत पर हाईकोर्ट गंभीर

Thu, 05 Aug 2021 09:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • सरकारी वकीलों की तैयारी सही न होने के कारण पेश नहीं कर पाते तथ्य
  • अपर महाधिवक्ता को छह हफ्ते में रिपोर्ट तैयार कर पेश करने का निर्देश
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकील की सही तैयारी न होने व कोर्ट में तथ्य पेश न हो पाने को गंभीरता से लिया है। अभियोजन पक्ष की ओर से सही तथ्य पेश न करने के कारण अभियुक्त को जमानत देनी पड़ती है। कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल को छह हफ्ते में रिपोर्ट तैयार कर 15 सितंबर को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने कहा है कि यह देखें कि सरकारी वकील को केस की तैयारी का उचित समय मिले ताकि जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान कोर्ट में केस के सही तथ्य पेश किए जा सकें। कोर्ट ने कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य सरकार सबसे बड़ी वादकारी है। हर दिन एक हजार जमानत अर्जी दाखिल हो रही है। बिना सही तैयारी के कारण अभियुक्तों को जमानत मिल जा रही है और समानता (पैरिटी) के आधार जमानत पर रिहा करने की मांग की जा रही है। इसलिए राज्य विधि अधिकारियों को सहूलियत दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने कहा है कि कुछ अभियुक्तों को जमानत मिलने की पैरिटी जमानत पर रिहा करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती। जमानत देने के लिए जरूरी तथ्यों पर गौर किया जाना जरूरी है। कोर्ट में सही तथ्य प्रस्तुत न होने के कारण सह अभियुक्त को मिली जमानत की पैरिटी के आधार पर आरोपी को जमानत का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने कहा जमानत एक नियम है, और जेल अपवाद । जमानत दी जाए या नहीं यह न्यायाधीश के न्यायिक विवेक पर निर्भर करता है। 
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कोर्ट ने 10 बजे रात दूकान में घुस कर 6लोगों द्वारा चापड़ आदि से हत्या करने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कोतवाली फतेहपुर के सोएब की अर्जी पर दिया है।  15 मई 19 को छह लोग सानू की दुकान में आते हैं और उसे बाहर खींच कर धारदार हथियार से हमला करते हैं। जिसमें एक की मौत हो जाती है व कई घायल हो जाते हैं। बचाने के लिए आए चश्मदीद गवाह भी घायल हुए हैं। मृतक के शरीर पर सात गंभीर चोटें आई। जिससे उसकी मौत हुई। बयानों से स्पष्ट है कि याची भी घटना के समय मौके पर मौजूद था।
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