सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि ओवरब्रिज की स्थिति को लेकर आईआईटी बीएचयू वाराणसी की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। उसी का इंतजार किया जा रहा है। इसलिए अतिरिक्त समय दिया जाए। सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश सिंह की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज रेलवे स्टेशन से हाईकोर्ट पानी टंकी तक बने रेलवे ओवरब्रिज को जर्जर होने के आधार पर बंद किए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के लिए एक मई को समय दिया है।सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि ओवरब्रिज की स्थिति को लेकर आईआईटी बीएचयू वाराणसी की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। उसी का इंतजार किया जा रहा है। इसलिए अतिरिक्त समय दिया जाए। सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश सिंह की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने दिया है।
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याची अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि पुल की कुछ ही साल पहले लाखों रुपये से मरम्मत की गई थी। बिना साइंटिफिक जांच रिपोर्ट के अचानक कमजोर बताकर बंद कर दिया गया है। इसे ध्वस्त किया जाना है, लेकिन उसी स्थान पर दूसरा रेलवे ओवरब्रिज बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।ब्रिज बंद होने से ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ रहा है। याचिका में पुल की जांच कर मरम्मत या नया रेलवे ओवरब्रिज बनाने का समादेश जारी करने की मांग की गई है।