नई व्यवस्था के तहत प्रश्न पत्रों को अलग से लोहे के डिजिटल लॉक वाले बक्सों में रखा जाएगा, जिस पर आगे-पीछे दो ताले लगेंगे और हर प्रश्न पत्र अलग से सील बंद पैकेट में होगा। ऐसे में परीक्षा केंद्रों में उतने ही प्रश्न भेजे जाएंगे, जितने अभ्यर्थी उस केंद्र में परीक्षा देने के लिए पंजीकृत हैं। अगर सभी अभ्यर्थी उपस्थिति नहीं हैं तो बचे हुए प्रश्न पत्रों को वापस डिजिटल लॉक वाले बक्सों में रख दिया जाएगा। अगर पंजीकृत अभ्यर्थियों की संख्या के मुकाबले बक्सों से कम पेपर निकलते हैं तो यह भी जांच का विषय होगा।
प्रश्न पत्रों की सुरक्षा को लेकर इन तमाम व्यवस्थाओं के लागू होने के बाद कोषागार से पेपर निकलने और अभ्यर्थियों के बीच वितरित होने तक हर चरण में यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि प्रश्न पत्रों से कोई छेड़छाड़ हुई है या नहीं। साथ ही परीक्षा से पहले या परीक्षा के दौरान अगर पेपर वायरल होने के आरोप लगाए जाते हैं तो यह पता लगाने में भी देर नहीं लगेगी कि गड़बड़ी हुर्ह है या नहीं और अगर हुई है तो किस स्तर पर की गई है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।