इविंग क्रिश्चियन कॉलेज (ईसीसी) में कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति हो जाने से कॉलेज के शिक्षकों का वेतन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। प्राचार्य पद के विवाद के कारण दो माह से कॉलेज के शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का वेतन फंसा हुआ है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन और कॉलेज प्रबंधतंत्र के बीच लड़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों को हुआ। कॉलेज के प्रबंधतंत्र ने पूर्व प्राचार्य डॉ. एम मैसी की पत्नी डॉ. पीएस मैसी को प्राचार्य पद पर नियुक्त किया था, लेकिन इविवि प्रशासन इसे मानने को तैयार नहीं था। इविवि प्रशासन का तर्क था कि पीएस मैसी की प्राचार्य पद पर नियुक्ति यूजीसी के नियमों का उल्लंघन है। वह प्राचार्य पद की योग्यता नहीं रखती हैं। इविवि प्रशासन ने उस वरिष्ठ शिक्षक को प्राचार्य बनाने के लिए कहा, जो इस पद के लिए अनिवार्य अर्हता रखते हो।
प्रबंधतंत्र इसके लिए तैयार नहीं था और इसी विवाद में कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों को दो माह तक वेतन नहीं मिला। इससे कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ गया। आंदोलन शुरू हुआ तो प्रबंधतंत्र को बैकफुट पर आना पड़ा और अब डॉ. अरुण सैलिक मोसेज को कार्यवाहक प्राचार्य बना दिया गया है। ईसीसी के चेयरमैन डॉ. पीटर बलदेव ने डॉ. अरुण को पत्र जारी करते हुए कहा कि प्राचार्य पद पर नियमित नियुक्ति होने तक वह कार्यवाहक प्राचार्य के तौर पर अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालेंगे। साथ ही अपनी मूल ड्यूटी भी करते रहेंगे।
जिस वक्त यह आदेश जारी हुआ, उस समय वेतन के मुद्दे पर ही कॉलेज के शिक्षक संघ की बैठक चल रही थी। बैठक के बीच में ही आदेश पहुंचा तो शिक्षकों ने राहत की सांस ली। इस बदलाव के बाद कॉलेज के शिक्षकों एवं कर्मचारियों का वेतन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. रणधीर सिंह, पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह, ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने उम्मीद जताई है कि यूजीसी नियमों के तहत कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति होने से विवाद का अंत होगा और जल्द ही इविवि प्रशासन कॉलेज के शिक्षकों के वेतन का भुगतान कर देगा।