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डॉ. अर्चना सुसाइड केस : प्रयागराज के चिकित्सक बोले - सिस्टम की प्रताड़ना से हुई हत्या

Fri, 01 Apr 2022 09:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

राजस्थान की घटना हवाला देते हुए इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी डॉ. अनूप चौहान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि इस प्रकार मामलों में तत्काल डॉक्टर की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। न ही कोई अदालत या उपभोक्ता फोरम नोटिस जारी करे।
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मृतक डॉक्टर अर्चना शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डॉक्टर को भले ही लोग भगवान का दर्जा देते हों, लेकिन वह भी इंसान ही हैं। डॉक्टर पूरी जिम्मेदारी से मरीज का इलाज करते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस का भी अपना दायरा है। इसके आगे वह भी कुछ नहीं कर सकते। ऐसे में डॉक्टरों को दोषी मानना और उन्हें प्रताड़ित करना अपराध है। यह कहना है शहर के चिकित्सकों का। राजस्थान के दौसा में लोगों की प्रताड़ना और मुकदमा दर्ज होने के बाद डॉ. अर्चना शर्मा द्वारा आत्महत्या की घटना ने चिकित्सकों को झकझोर दिया है। 

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राजस्थान की घटना हवाला देते हुए इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी डॉ. अनूप चौहान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि इस प्रकार मामलों में तत्काल डॉक्टर की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। न ही कोई अदालत या उपभोक्ता फोरम नोटिस जारी करे। शहर में ही कई ऐसे मामले अक्सर प्रकाश में आते है, जब इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु हो जाती है। जिसके बाद  परिजन हंगामा और तोड़फोड़ करने लगते हैं।

 

 

मरीजों के परिजनों और समाज के लोगों को भी इस बात को समझने की जरूरत है कि कोई भी डॉक्टर किसी मरीज का अहित क्यों चाहेगा। मरीज ठीक होता है, तो डॉक्टर को भी खुशी होती है कि उसका प्रयास और मेहनत रंग लाई। वह किसी का जीवन बचाने में कामयाब हुआ। 

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आए दिन डॉक्टरों को होती है दिक्कत, स्थायी समाधान निकले

सीनियर फिजिशियन डॉ. एमके मदनानी कहते हैं,  डॉ. अर्चना की आत्महत्या बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सही है कि हम डॉक्टरों को आए दिन दिक्कत होती है। इसका स्थायी समाधान होना चाहिए। गलत कार्य करने वालों के मन में खौफ हो। जिसके लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए। डॉक्टरों के किसी भी कैरिकुलम में ऐसे लोगों को किस प्रकार डील करना है, यह नहीं बताया जाता है। साढ़े चार साल के एमबीबीएस कोर्स में इस पर भी सिखाना चाहिए। 
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सिस्टम की प्रताड़ना से हुई हत्या
गायनोलॉजिस्ट डॉ. गरिमा त्रिवेदी डॉ. अर्चना पर लगे आरोपों को गलत बताती हैं। साथ ही कहती हैं, यह आत्महत्या नहीं, सिस्टम की प्रताड़ना से हुई हत्या है। इंसान दबाव में आकर खुदकुशी जैसा कदम उठाता है।
 
 
इसी तरह एएमए सचिव डॉ. आशुतोष गुप्ता भी इससे सहमत दिखते हैं। कहते हैं, डॉ. अर्चना शर्मा ने कतिपय नेताओं, पुलिस तंत्र के दबाव में आकर आत्महत्या की है। यह पूरे सिस्टम पर करारा तमाचा है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने देना है। साथ ही गुजारिश करते हैं कि सभी लोग डॉ. अर्चना के परिवार और डॉक्टर कम्युनिटी को सपोर्ट करें। 


वहीं एमए के वित्त सचिव डॉ. युगांतर पांडेय इस घटना के लिए असामाजिक तत्वों के साथ पुलिस को भी दोषी ठहराते हैं। कहते हैं कि दौसा की घटना भीड़तंत्र के प्रयोग का घिनौना उदाहरण है। चिकित्सकों का इस प्रकार का शोषण आम बात हो गई है। 
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