आए दिन डॉक्टरों को होती है दिक्कत, स्थायी समाधान निकले
सीनियर फिजिशियन डॉ. एमके मदनानी कहते हैं, डॉ. अर्चना की आत्महत्या बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सही है कि हम डॉक्टरों को आए दिन दिक्कत होती है। इसका स्थायी समाधान होना चाहिए। गलत कार्य करने वालों के मन में खौफ हो। जिसके लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए। डॉक्टरों के किसी भी कैरिकुलम में ऐसे लोगों को किस प्रकार डील करना है, यह नहीं बताया जाता है। साढ़े चार साल के एमबीबीएस कोर्स में इस पर भी सिखाना चाहिए।
सिस्टम की प्रताड़ना से हुई हत्या
गायनोलॉजिस्ट डॉ. गरिमा त्रिवेदी डॉ. अर्चना पर लगे आरोपों को गलत बताती हैं। साथ ही कहती हैं, यह आत्महत्या नहीं, सिस्टम की प्रताड़ना से हुई हत्या है। इंसान दबाव में आकर खुदकुशी जैसा कदम उठाता है।
इसी तरह एएमए सचिव डॉ. आशुतोष गुप्ता भी इससे सहमत दिखते हैं। कहते हैं, डॉ. अर्चना शर्मा ने कतिपय नेताओं, पुलिस तंत्र के दबाव में आकर आत्महत्या की है। यह पूरे सिस्टम पर करारा तमाचा है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने देना है। साथ ही गुजारिश करते हैं कि सभी लोग डॉ. अर्चना के परिवार और डॉक्टर कम्युनिटी को सपोर्ट करें।
वहीं एमए के वित्त सचिव डॉ. युगांतर पांडेय इस घटना के लिए असामाजिक तत्वों के साथ पुलिस को भी दोषी ठहराते हैं। कहते हैं कि दौसा की घटना भीड़तंत्र के प्रयोग का घिनौना उदाहरण है। चिकित्सकों का इस प्रकार का शोषण आम बात हो गई है।