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Doctor Death Case : खुदकुशी, हत्या या हादसे की थ्योरी में उलझा डॉक्टर की मौत का मामला

Wed, 02 Oct 2024 06:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जानकारों का कहना है कि संदिग्ध हालात में मौत के मामले में पुलिस की जांच जिन प्रमुख बिंदुओं पर टिकी होती है, उनमें क्राइम सीन, एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व परिस्थितिजन्य साक्ष्य बेहद अहम होते हैं। इनसे सामने आए तथ्यों के आधार पर ही जांच आगे बढ़ाई जाती है और अधिकांश मामलों में खुलासे इसी आधार पर किए जाते हैं।
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डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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एसआरएन अस्पताल में डॉक्टर की संदिग्ध हालात में मौत कैसे हुई, तीन दिन बाद भी यह राज बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि घटना खुदकुशी, हत्या या हादसे की थ्योरी में उलझकर रह गई है। मामले में क्राइम सीन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफआईआर और परिस्थितिजन्य साक्ष्य से भी अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।

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जानकारों का कहना है कि संदिग्ध हालात में मौत के मामले में पुलिस की जांच जिन प्रमुख बिंदुओं पर टिकी होती है, उनमें क्राइम सीन, एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व परिस्थितिजन्य साक्ष्य बेहद अहम होते हैं। इनसे सामने आए तथ्यों के आधार पर ही जांच आगे बढ़ाई जाती है और अधिकांश मामलों में खुलासे इसी आधार पर किए जाते हैं।

हालांकि, इस मामले में बड़ी चुनौती यह है कि तीनों ही प्रमुख बिंदुओं से मिलने वाले निष्कर्ष घटना को अलग ही रूप दे रहे हैं। ऐसे में कौन सा निष्कर्ष सही है, इसका निर्धारण आसान नहीं होगा। इसमें समय भी लग सकता है।

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थ्योरी 1

जानकारों का कहना है कि अब तक सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, डॉक्टर की गाड़ी में ही एनेस्थीसिया की दवाओं के दो इंजेक्शन वॉयल व सिरिंज मिलीं। गाड़ी में किसी तरह के संघर्ष के निशान नहीं मिले। यह भी बात सामने आई कि उन्होंने खुद सुबह हाथ में कैनुला लगवाया। इससे आशंका है कि उन्होंने खुदकुशी की कोशिश की।

थ्योरी 2

उधर परिजनों की तहरीर में हत्या का आरोप लगाया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी इसी तथ्य की ओर इशारा कर रही है। दरअसल, पोस्टमार्टम में मौत का कारण दम घुटना आया है। मेडिकल टर्म में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘एसफिक्सिया ड्यू टू एंटी मॉर्टम स्ट्रैंगुलेशन’ दर्शाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति तब बनती है जब गले को बाहरी बल से दबाया जाता है। इससे मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह प्रतिबंधित हो जाता है और यह बेहोशी या मौत का कारण बन जाता है।

थ्योरी 3

जानकारों के मुताबिक, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से इस आशंका को भी नकारा नहीं जा सकता है कि इलाज के दौरान उन्हें कोई चोट लगी हो और फिर यह उनके लिए जानलेवा साबित हुई हो। दरअसल, डॉक्टर की सांस की नली भी क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है। जांच में यह बात सामने आई है कि सांस न चलने के कारण एमआईसीयू ले जाने के दौरान डॉक्टर कार्तिकेय की सांस की नली में ट्यूब डालने का प्रयास किया गया था। आशंका यह भी है कि कहीं इसी दौरान तो श्वासनली क्षतिग्रस्त नहीं हुई। एएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुजीत सिंह ने बताया कि सांस न चलने पर मरीज की श्वासनली में ट्यूब डालकर उसकी जान बचाई जाती है। इसे ट्रैकियल इंट्यूबेशन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में कई बार श्वासनली को हल्का सा दबाने की भी जरूरत पड़ती है।

घटना के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कराई जा रही है। प्रकरण से जुड़े सभी लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। वैज्ञानिक साक्ष्यों का भी एनालिसिस किया जा रहा है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। - अभिषेक भारती, डीसीपी नगर
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परिजन बोले- गलत हैं बेटी पर लगाए गए आरोप

डॉक्टर की मौत के मामले में आरोपी बनाई गईं डॉ. अनामिका के परिजन ने उन पर लगे सभी आरोप गलत बताए हैं। उनका कहना है कि दोनों साथ पढ़ते थे और इस नाते उनकी दोस्ती थी। अन्य जो भी आरोप लगाए गए हैं, वह पूरी तरह से गलत हैं। बेटी ने कभी भी डॉक्टर को अपमानित नहीं किया। उसके बारे में यह भी आरोप लगाए गए कि उसने खुद कहा कि वह किसी अन्य के साथ है जो पूरी तरह से बेबुनियाद है।

मेरे अधीन नहीं थे कार्यरत, कभी कोई विवाद नहीं हुआ

प्रकरण में आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर सचिन यादव का कहना है कि डॉ. कार्तिकेय उनके अधीन कार्यरत नहीं थे। मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई। पिछले एक वर्ष से टेलीफोन या व्यक्तिगत रूप से उनसे कोई संवाद नहीं हुआ। मैं एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हूं और वह जूनियर रेजीडेंट थे। ऐसे में उनसे किसी तरह का द्वेष रखने का सवाल ही नहीं उठता। मेरी ओपीडी बृहस्पतिवार व ओटी ड्यूटी बुधवार को होती है और इन दोनों दिनों में डॉ. कार्तिकेय वहां मौजूद नहीं रहते थे। ऐसे में अपमानित या परेशान करने का सवाल ही नहीं उठता। हम सभी चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो और मामले की सत्यता सामने आए।
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