डॉ.अजय ने बताया कि मनुष्य के शरीर में 39 ट्रिलियन (39 खरब) बैक्टीरिया मौजूद हैं। मनुष्य की आंत में बैक्टीरिया की पांच सौ से एक हजार प्रजातियां रहती हैं। इन बैक्टीरिया में स्वास्थ्य के रखरखाव और एंटी एजिंग प्रभाव होते हैं। जैसे कि पाचन और अवशोषण में सहायता करना और प्रतिरक्षा को उत्तेजित करना। ऐसे बैक्टीरिया रक्षा प्रणाली की तरह हमारे शरीर में मौजूद प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले खराब बैक्टीरिया से लड़ कर तमाम रोगों एवं बाह्य हमले से हमारी रक्षा करते हैं।
हम जब ऐसे किसी पदार्थ का उपयोग करते हैं, जिनमें बैक्टीरिया को मारने की क्षमता होती है तो वो हमारे अच्छे बैक्टीरिया को भी नष्ट कर देते हैं। इससे हमारे शरीर का रक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है और खतरनाक बीमारियों को जन्म देने वाले बैक्टीरिया हावी होने लगते हैं। जर्नल ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित शोध के अनुसार जिन परीक्षण विषयों ने तीन महीने तक रोजाना माउथवॉश का इस्तेमाल किया, उनमें दो बैक्टीरिया ‘फ्यूसोबैक्टीरियम न्यूक्लियेटम’ और ‘स्ट्रेप्टोकोकस एंजिनोसस’ की अधिक सांद्रता देखी गई और दोनों बैक्टीरिया को कैंसरकारी हैं।
चिकित्सक भी सीमित समय के लिए देते हैं एंटीबायोटिक
डॉ.अजय सोनकर बताते हैं कि किसी भी बीमारी के लिए चिकित्सक भी सीमित समय के लिए एंटीबायोटिक देते हैं। एंटीबायोटिक का इस्तेमाल ऐसे बैक्टीरिया को मारने के लिए किया जाता है, जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। अगर अधिक दिनों तक इनका इस्तेमाल किया जाए तो शरीर में तमाम व्याधियां उत्पन्न हो जाती हैं और नई बीमारियों का कारण बनती हैं।
ऐसे नुकसान पहुंचाता है तांबे के बर्तन में रखा पानी
डॉ.अजय ने प्रयागराज स्थित अपनी प्रयोगशाला में शोध के दौरान तांबे के एक बर्तन में पानी रख दिया। बाद में इसकी जांच की तो पता चला कि उसमें आयन उत्पन्न हो गए थे, जो एंटी बैक्टीरियल होते हैं। आयन में विषम संख्या में इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं और चार्ज होते हैं। जब यह टूटकर बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं तो उसे भी तोड़ देते हैं। ऐसे में बैक्टीरिया मरने लग जाते हैं। फ्रेंड बैक्टीरिया के मरने पर कैंसरकारी बैक्टीरिया या शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य बैक्टीरिया, जो शरीर में पहले से मौजूद रहते हैं, वे अनियंत्रित होकर गंभीर बीमारियों को जन्म देते हैं।