फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट : मासूम से दुष्कर्म में मिली फांसी की सजा 25 साल की कैद में तब्दील, हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

Thu, 25 Jul 2024 04:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मामला औरैया के बिधूना कोतवाली क्षेत्र का है। वादी ने एफआईआर दर्ज कराई थी कि 20 अक्तूबर 2021 को दोपहर 2:30 बजे उसकी तीन वर्षीय नातिन अपने दरवाजे पर खेल रही थी। इसी बीच गांव के शिव प्रेम का धनवाली निवासी साला प्रेम नरेश पीड़िता को बिस्कुट का लालच देकर ले गया।
विज्ञापन
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन साल की मासूम से दुष्कर्म में युवक को मिली फांसी की सजा 25 साल की कैद में तब्दील कर दी है। यह फैसला न्यायमूर्ति अरविंद कुमार सांगवान और न्यायमूर्ति मो.अजहर हुसैन इदरीशी की खंडपीठ ने दोषी प्रेम नरेश की ओर से फांसी के खिलाफ दाखिल अपील और सजा की पुष्टि के लिए जिला अदालत से भेजे गए संदर्भ पर एक साथ सुनवाई करते हुए सुनाया है।

विज्ञापन


मामला औरैया के बिधूना कोतवाली क्षेत्र का है। वादी ने एफआईआर दर्ज कराई थी कि 20 अक्तूबर 2021 को दोपहर 2:30 बजे उसकी तीन वर्षीय नातिन अपने दरवाजे पर खेल रही थी। इसी बीच गांव के शिव प्रेम का धनवाली निवासी साला प्रेम नरेश पीड़िता को बिस्कुट का लालच देकर ले गया। थोड़ी देर बाद नातिन की शिव प्रेम के कमरे से रोने की आवाज सुनाई दी। मौके पर परिजन पहुंचे तो प्रेम नरेश भाग निकला। पता चला कि प्रेम नरेश ने नातिन के साथ दुष्कर्म किया था। वादी की रिपोर्ट पर कोतवाली बिधूना में दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट का मामला दर्ज किया गया।

पुलिस ने विवेचना में मामले की चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की। कोर्ट ने 24 मार्च 2022 को अभियुक्त के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए। यह मुकदमा विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट में चला। प्रस्तुत मामले में वादी, डॉक्टर, मां, पीड़िता व पुलिस कर्मी समेत सात लोगों की गवाही कोर्ट में हुई। इसके बाद औरैया सत्र न्यायालय की विशेष अदालत ने 11 माह में सुनवाई पूरी कर प्रेम नरेश को दोषी करार दिया। फांसी की सजा के साथ पांच लाख के अर्थदंड की सजा भी सुनाई थी।
विज्ञापन


उसके खिलाफ जेल में बंद दोषी ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने अपील की आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए फांसी की सजा की 25 साल की तय अवधि की उम्रकैद में तब्दील कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह विरल से विरलतम मामला नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें