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Health : मधुमेह के घाव की सटीक जानकारी में सीटी एंजियोग्राफी अहम, शोध में किया गया दावा

Sun, 26 Nov 2023 05:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इस दौरान 49 ऐसे लोगों को चुना गया, जिन्हें मधुमेह की समस्या थी और उनके पैर में या फिर किसी अन्य स्थान पर घाव हो गया था। सितंबर 2021 से सितंबर 2022 तक चले शोध में पाया गया कि घाव की जांच करने में सीटी एंजियोग्राफी काफी कारगर है।
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मधुमेह - फोटो : social media
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विस्तार
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मधुमेह के मरीजों के घाव की सटीक जानकारी का पता लगाने में सीटी एंजियोग्राफी अहम है। यह शोध मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जरी विभाग में किया गया है। हालांकि, सीटी एंजियोग्राफी का इस्तेमाल पहले से हो रहा है, लेकिन मधुमेह से होने वाले घाव में कितनी कारगर है यह जानने के लिए सीनियर रेजिडेंट डॉ.वियन कुमार चौरसिया व उनकी टीम ने एक साल तक इस पर काम किया। इस दौरान 49 ऐसे लोगों को चुना गया, जिन्हें मधुमेह की समस्या थी और उनके पैर में या फिर किसी अन्य स्थान पर घाव हो गया था। सितंबर 2021 से सितंबर 2022 तक चले शोध में पाया गया कि घाव की जांच करने में सीटी एंजियोग्राफी काफी कारगर है।

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अब कई मरीजों के घाव का सीटी एंजियोग्राफी करके इलाज किया जा रहा है। जनरल सर्जन डॉ.वियन कुमार चौरसिया ने बताया कि सीटी एंजियोग्राफी करने से पहले मरीज की नसों में इंट्रावेनस डाली डाली जाती है। इसमें घाव ब्लॉकेज कहां तक है, इसका पता लगाया जाता है। अगर ब्लॉकेज 50 से 60 फीसदी के ऊपर है तो बाईपास ग्राफ्टिंग करनी पड़ती है। अगर ब्लॉकेज 50 फीसदी से नीचे है तो घाव दवा व ड्रेसिंग करने से ठीक हो जाता है। इससे पहले मरीज के घाव की गंभीरता का पता नहीं चल पाता था। अधिकतर मरीजों के घाव का इलाज दवा व ड्रेसिंग से ही किया जाता था। ऐसे ही चार लोग नजीर के तौर पर हैं, जिन पर शोध हुआ है।

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केस-1

प्रयागराज निवासी 56 वर्षीय एक किसान के बाएं पैर में घाव था। उनका इलाज अक्तूबर 2022 में किया गया। इस दौरान उनके घाव की सीटी एंजियोग्राफी की गई, जिसमें पता चला कि घाव ज्यादा गहरा नहीं है। इसके बाद दवा और ड्रेसिंग के जरिये 20 से 25 दिनों में उनका घाव ठीक कर दिया गया।

केस-2

चित्रकूट निवासी 62 वर्षीय एक मधुमेह के मरीज के बाएं पैर में घाव था। नवंबर 2022 में सीटी एंजियोग्राफी करने पर पता चला कि इनका घाव दवा और ड्रेसिंग से ठीक हो सकता है। मात्र एक माह के अंदर वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हो गए।

केस-3

कौशाम्बी के 58 वर्षीय मधुमेह के मरीज के बाएं पैर का अंगूठा काला पड़ गया था। सीटी एंजियोग्राफी में पाया गया कि 70 फीसदी ब्लॉकेज है। इसके बाद उनके अंगूठे का काटकर अलग किया गया और उनकी बाईपास ग्राफ्टिंग की गई। इस वजह से घाव फैल नहीं सका।

केस-4

कौशाम्बी निवासी 70 डायबिटीज से पीड़ित के दाहिने पैर की तालू में गहरा घाव था। सीटी एंजिग्राफी में पता चला कि दाहिने पैर में ब्लॉकेज 80 फीसदी है। इसके बाद मरीज का ऑपरेशन किया गया।


सीटी एंजियोग्राफी का इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है, लेकिन इसको परखने के लिए 49 लोगाें में शोध किया गया। इस दौरान पता चला कि इससे मरीज के घाव की सटीक जानकारी मिलती है। इससे इलाज में सहायता मिलती है। - डॉ. वियन कुमार चौरसिया, जनरल सर्जन, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज
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