केस-1
प्रयागराज निवासी 56 वर्षीय एक किसान के बाएं पैर में घाव था। उनका इलाज अक्तूबर 2022 में किया गया। इस दौरान उनके घाव की सीटी एंजियोग्राफी की गई, जिसमें पता चला कि घाव ज्यादा गहरा नहीं है। इसके बाद दवा और ड्रेसिंग के जरिये 20 से 25 दिनों में उनका घाव ठीक कर दिया गया।
केस-2
चित्रकूट निवासी 62 वर्षीय एक मधुमेह के मरीज के बाएं पैर में घाव था। नवंबर 2022 में सीटी एंजियोग्राफी करने पर पता चला कि इनका घाव दवा और ड्रेसिंग से ठीक हो सकता है। मात्र एक माह के अंदर वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हो गए।
केस-3
कौशाम्बी के 58 वर्षीय मधुमेह के मरीज के बाएं पैर का अंगूठा काला पड़ गया था। सीटी एंजियोग्राफी में पाया गया कि 70 फीसदी ब्लॉकेज है। इसके बाद उनके अंगूठे का काटकर अलग किया गया और उनकी बाईपास ग्राफ्टिंग की गई। इस वजह से घाव फैल नहीं सका।
केस-4
कौशाम्बी निवासी 70 डायबिटीज से पीड़ित के दाहिने पैर की तालू में गहरा घाव था। सीटी एंजिग्राफी में पता चला कि दाहिने पैर में ब्लॉकेज 80 फीसदी है। इसके बाद मरीज का ऑपरेशन किया गया।
सीटी एंजियोग्राफी का इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है, लेकिन इसको परखने के लिए 49 लोगाें में शोध किया गया। इस दौरान पता चला कि इससे मरीज के घाव की सटीक जानकारी मिलती है। इससे इलाज में सहायता मिलती है। - डॉ. वियन कुमार चौरसिया, जनरल सर्जन, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज