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Prayagraj : घर का इकलौता बेटा है परिचालक, अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहा है जंग

Sun, 26 Nov 2023 04:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पिता रामशिरोमण ने बताया कि हरिकेश से छोटी उनकी दो बेटियां हैं। उन्होंने बताया कि सुबह छह बजे से उसकी ड्यूटी होने की वजह से वह नैनी में अपने तीन अन्य साथियों के साथ किराए पर रहता है। चार-पांच दिन में वह घर आता है।
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बस कंडक्टर हरिकेश के माता-पिता। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सराय ममरेज थाना क्षेत्र के सेमरी गांव निवासी परिचालक हरिकेश विश्वकर्मा चापड़ के हमले के बाद एसआरएन अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। वहीं शनिवार को आईसीयू वार्ड के बाहर बैठे पिता से बेटे का हाल पूछने पर भावुक हो गए। बोले मेरे घर का इकलौता चिराग है। भगवान मुझे ना जाने किस पाप की सजा दे रहे हैं। यह कहते हुए उनके आंखों से आंसू निकल पड़े।

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पिता रामशिरोमण ने बताया कि हरिकेश से छोटी उनकी दो बेटियां हैं। उन्होंने बताया कि सुबह छह बजे से उसकी ड्यूटी होने की वजह से वह नैनी में अपने तीन अन्य साथियों के साथ किराए पर रहता है। चार-पांच दिन में वह घर आता है। शुक्रवार सुबह आठ बजे वह फर्नीचर की दुकान पर काम करने चले गए। करीब साढ़े नौ बजे उनके पास फोन आया कि हरिकेश के ऊपर किसी ने धारदार हथियार से हमला कर दिया है। यह खबर सुनते ही घर के सब लोग पागल हो गए। आज दो दिनों से घर में चूल्हा तक नहीं जला है।

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साथी परिचालकों की वजह से बची बेटे की जान, छह साथियों ने दिया खून

परिचालक हरिकेश की जान बचाने के लिए शुक्रवार को उनके साथी चालक व परिचालकों ने दोस्त की जान बचाने के लिए अपना जी-जान लगा दिया। हमला के बाद साथी चालक व परिचालक ने बिना देरी किए हरिकेश को एसआराएन अस्पताल में भर्ती कराया। साथी विनोद सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही दर्जनभर चालक व परिचालक अस्पताल में पहुंच गए। उस समय हरिकेश के परिवार से कोई भी नहीं था।

डॉक्टरों ने जब दवा के लिए कहा तो सभी ने अपने पास से मिलाकर 15 हजार रुपये इकट्ठा किए और इलाज के लिए जो भी दवाओं के लिए कहा गया। वह मौके पर लाते रहे। वहीं जब डॉक्टरों ने खून की व्यवस्था करने की बात कही ताे उसमें भी बिना देरी किए हुए दो डिपो अधिकारी अनुपम व अमित मिश्रा और चार परिचालक अमित सिंह, दीपक कुमार व दो अन्य लोगों ने अपना खून दिया। वहीं पिता रामशिरोमण ने कहा कि वह सभी के सहयोग को जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। आज इन्हीं की वजह से मेरे बेटे की जान बची है।

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