साथी परिचालकों की वजह से बची बेटे की जान, छह साथियों ने दिया खून
परिचालक हरिकेश की जान बचाने के लिए शुक्रवार को उनके साथी चालक व परिचालकों ने दोस्त की जान बचाने के लिए अपना जी-जान लगा दिया। हमला के बाद साथी चालक व परिचालक ने बिना देरी किए हरिकेश को एसआराएन अस्पताल में भर्ती कराया। साथी विनोद सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही दर्जनभर चालक व परिचालक अस्पताल में पहुंच गए। उस समय हरिकेश के परिवार से कोई भी नहीं था।
डॉक्टरों ने जब दवा के लिए कहा तो सभी ने अपने पास से मिलाकर 15 हजार रुपये इकट्ठा किए और इलाज के लिए जो भी दवाओं के लिए कहा गया। वह मौके पर लाते रहे। वहीं जब डॉक्टरों ने खून की व्यवस्था करने की बात कही ताे उसमें भी बिना देरी किए हुए दो डिपो अधिकारी अनुपम व अमित मिश्रा और चार परिचालक अमित सिंह, दीपक कुमार व दो अन्य लोगों ने अपना खून दिया। वहीं पिता रामशिरोमण ने कहा कि वह सभी के सहयोग को जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। आज इन्हीं की वजह से मेरे बेटे की जान बची है।