अगर किसी इंसान को कार्डियक अरेस्ट हुआ है तो सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) सबसे ज्यादा कारगर होता है। कार्डियक अरेस्ट होने की स्थिति में मरीज को 10 सेकेंड के अंदर दिया गया सीपीआर संजीवनी का काम करता है। यह बातें शनिवार को राजरूपपुर 60 फिट रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में अमर उजाला व इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन द्वारा आयोजित सीपीआर की कार्यशाला के दौरान मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अभिषेक सचदेवा ने कहीं।
उन्होंने बताया कि व्यक्ति की सांस रुकने के बाद अगले दस सेकेंड के अंदर सीपीआर दिया जाना जरूरी है। इस दौरान मरीज को ठोस स्थान पर लेटाकर उसके सीने के बीचों-बीच दोनों हाथों को रखकर बिना कोहनी को मोड़े पुश करना होता है। ऐसा करने पर मरीज का सीना चार से पांच सेंटीमीटर तक अंदर जाना जरूरी होता है। इस तरह से एक मिनट में कम से कम 100 बार दोनों हाथों से सीने को धकेला जाता है।
वहीं, हर 30 पुश के बाद मरीज के माथे को हल्का पीछे करके उसके मुंह में हवा देनी होती है। इसके बाद देखना होता है कि मरीज की छाती फूल रही है कि नहीं। मरीज के अस्पताल पहुंचने तक यह प्रक्रिया बराबर करनी होती है। इससे जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य वागेश मिश्रा, आचार्य अनुराग गौतम, त्रिवेणी नाथ मिश्र, अजय, ऋचा, दीक्षा, प्राची सहित अन्य मौजूद रहे।
कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर
- हार्ट अटैक के दौरान हृदय की नसों में ब्लॉकेज होने लगता है।
- कार्डियक अरेस्ट में दिल का धड़कना अचानक बंद हो जाता है।
- हार्ट अटैक होने पर कार्डियक अरेस्ट हो सकता है, मगर हर कार्डियक अरेस्ट का कारण हार्ट अटैक नहीं होता है।