कोर्ट ने डीजीपी को किया था तलब
राजवीर की हत्या की 25 जून 1999 को हुई थी। अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। सीजेएम कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट का संज्ञान ले लिया। इस बीच सरकार ने आठ दिसंबर 1999 को विवेचना सीबीसीआईडी को स्थानांतरित कर दी। कोर्ट ने फाइनल रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने सीजेएम कोर्ट के चार्जशीट का संज्ञान लेकर आरोपियों के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने पर रोक लगा दी। साथ ही, सीजेएम को विवेचना की फाइनल रिपोर्ट पेश करने का सीबीसीआईडी को आदेश देने का निर्देश दिया। इसके बाद याची ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर फाइनल रिपोर्ट पेश करने का अनुरोध किया, किंतु आदेश के बावजूद हुआ कुछ नहीं। हाईकोर्ट ने 2001 में आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी। बावजूद इसके पीड़ित को न्याय नहीं मिला। इसके बाद कोर्ट ने महानिदेशक सीबीसीआईडी को तलब किया था।
कोर्ट ने साफगोई पर की तारीफ
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महानिदेशक विजय कुमार और शासकीय अधिवक्ता एके संड की तारीफ भी की। दरअसल, महानिदेशक ने बताया कि कोर्ट में विवेचना रिपोर्ट दाखिल तो हुई है, लेकिन 18 साल की बहुत देरी से। देरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं। इसके संबंध में उन्होंने हलफनामा भी प्रस्तुत किया। इसी के बाद कोर्ट ने यह टिप्पणी की।