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कोर्ट ने सीजेएम से पूछा-फाइनल रिपोर्ट पेश हुई या नहीं, 31 अक्तूबर को हलफनामे सहित पुलिस अधिकारी तलब

Sat, 14 Oct 2023 12:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बागपत जिले में राजवीर की हत्या की 25 जून 1999 को हुई थी। अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। सीजेएम कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट का संज्ञान ले लिया। इस बीच सरकार ने आठ दिसंबर 1999 को विवेचना सीबीसीआईडी को स्थानांतरित कर दी। कोर्ट ने फाइनल रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बागपत में 25 जून 1999 को राजवीर की हत्या की विवेचना रिपोर्ट पेश न कर पाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश हुए महानिदेशक (डीजी) सीबीसीआईडी विजय कुमार ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि 18 साल की देरी करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश दे दिया गया है। फाइनल रिपोर्ट 17 जनवरी 2019 को सीजेएम बागपत की अदालत में दाखिल की जा चुकी है। हाईकोर्ट ने 31 अक्तूबर को हलफनामे सहित पुलिस अधिकारी तलब किए हैं।

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न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने धर्मपाल सिंह व सात अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सीबीसीआईडी महानिदेशक विजय कुमार ने कोर्ट को बताया कि फाइनल रिपोर्ट का सरकार ने अनुमोदन कर दिया है। याची के खिलाफ हत्या में लिप्त होने के सबूत नहीं मिले हैं। सरकार के समक्ष केस वापसी का मामला लंबित है। याची के अधिवक्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि फाइनल रिपोर्ट की मूल प्रति सीजेएम कोर्ट में अब भी दाखिल नहीं है।

इस पर कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 31 अक्तूबर नियत करते हुए हलफनामे के साथ संबंधित पुलिस अधिकारी को मौजूद रहने का आदेश दिया। साथ ही, सीजेएम बागपत को भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हाजिर होकर यह बताने को कहा है कि फाइनल रिपोर्ट की मूल प्रति दाखिल की गई है या नहीं।

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कोर्ट ने डीजीपी को किया था तलब

राजवीर की हत्या की 25 जून 1999 को हुई थी। अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। सीजेएम कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट का संज्ञान ले लिया। इस बीच सरकार ने आठ दिसंबर 1999 को विवेचना सीबीसीआईडी को स्थानांतरित कर दी। कोर्ट ने फाइनल रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट ने सीजेएम कोर्ट के चार्जशीट का संज्ञान लेकर आरोपियों के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने पर रोक लगा दी। साथ ही, सीजेएम को विवेचना की फाइनल रिपोर्ट पेश करने का सीबीसीआईडी को आदेश देने का निर्देश दिया। इसके बाद याची ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर फाइनल रिपोर्ट पेश करने का अनुरोध किया, किंतु आदेश के बावजूद हुआ कुछ नहीं। हाईकोर्ट ने 2001 में आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी। बावजूद इसके पीड़ित को न्याय नहीं मिला। इसके बाद कोर्ट ने महानिदेशक सीबीसीआईडी को तलब किया था।
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कोर्ट ने साफगोई पर की तारीफ

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महानिदेशक विजय कुमार और शासकीय अधिवक्ता एके संड की तारीफ भी की। दरअसल, महानिदेशक ने बताया कि कोर्ट में विवेचना रिपोर्ट दाखिल तो हुई है, लेकिन 18 साल की बहुत देरी से। देरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं। इसके संबंध में उन्होंने हलफनामा भी प्रस्तुत किया। इसी के बाद कोर्ट ने यह टिप्पणी की।
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