कोर्ट ने याची के वरिष्ठ अधिवक्ता के इस तर्क से सहमति जताई कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 52 ए का पालन किया जाना बाध्यकारी है। इसके उल्लंघन से हुई बरामदगी की कार्रवाई दूषित हो जाएगी और आरोपी जमानत पाने का हकदार होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन ने सत्येंद्र कुमार भोक्ता की अर्जी स्वीकार करते हुए दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक किलो ब्राउन शुगर की तस्करी के आरोपी की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने याची के वरिष्ठ अधिवक्ता के इस तर्क से सहमति जताई कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 52 ए का पालन किया जाना बाध्यकारी है। इसके उल्लंघन से हुई बरामदगी की कार्रवाई दूषित हो जाएगी और आरोपी जमानत पाने का हकदार होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन ने सत्येंद्र कुमार भोक्ता की अर्जी स्वीकार करते हुए दिया है।
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इससे पहले याची की पहली जमानत अर्जी 23 जनवरी 23 को खारिज कर दी गई थी। दो आधारों पर दूसरी जमानत अर्जी दी गई थी। याची के अधिवक्ता का कहना था कि ब्राउन शुगर बरामदगी में धारा 52 ए का उल्लंघन किया गया।
मजिस्ट्रेट को सैंपल नहीं भेजा गया। याची बीते डेढ़ वर्ष से जेल में बंद हैं। ट्रायल शीघ्र पूरा होने की संभावना नहीं है। अब तक अभियोजन की सिर्फ एक गवाही हो सकी है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मांगीलाल केस में स्पीडी ट्रायल को अभियुक्त का मौलिक अधिकार करार दिया है। ट्रायल में देरी पर अभियुक्त को जमानत पर रिहा होने का हक है।