विधि-विधान से होगी कलश की स्थापना
मंदिरों से लेकर घरों तक सविधि मंत्रों से मां का आह्वान कर कलश स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही पुष्प, सुगंध और माला अर्पित कर मां का ध्यान किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक इस बार मां दुर्गा की की आराधना से भक्तों के हर मनोरथ पूरे होंगे। सुख-समृद्धि की प्राप्ति के योग हैं।
इस नवरात्र में भक्तों को अपनी क्षमता के अनुसार मां को पुष्प, फल और उनके प्रिय भोग अर्पित कर आराधना करनी चाहिए। किसी भी तरह के भय से मुक्ति के लिए दुर्गा सप्तशती के पाठ और अखंड दीप जलाकर कर मां का ध्यान करना फलदायी रहेगा। पालनहारिणी मां दुर्गा की नौ दिवसीय उपासना के फलित इस बार शुभ और मंगलकारी हैं।
कलश स्थापना ऐसे करें:
सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ कपड़े धारण करें। फिर वेदी सजाकर मां को लाल वस्त्र के आसन पर विराजित कराएं। मां को वस्त्र धारण कराने के बाद अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्पांजलि से उनका आह्वान करें। सबसे पहले गौरी,गणेश और नवग्रह की पूजा कर मां का आह्वान कर कलश स्थापना करनी चाहिए। कलश स्थापना के लिए मिट्टी की वेदियां बनाकर जौ की बोवाई करनी चाहिए। इसके बाद अखंड दीप जलाकर दुर्गा शप्तसती का पाठ आरंभ करें।
कलश स्थापना मुहूर्त:
कलश स्थापना के लिए मंगलवार को सबसे अच्छा समय सुबह ब्रह्म मुहूर्त में प्रात: 04: 31 बजे से 05: 17 बजे तक है।
इसके बाद मेष लग्न में सूर्योदय से 7:32 बजे तक ।
अभिजीत मूहुर्त- 11: 57 से 12:48 बजे तक।