ऐसे उजड़े और टूटकर गिरे कई पेड़ों को मलबे में दबा दिया गया है। पीडीए के सचिव अजीत कुमार सिंह का कहना है कि जिन पेड़ों को बचाया जाना संभव नहीं हो पा रहा है, वही काटे जा रहे हैं। इसके लिए हाईकोर्ट के निर्देशन में बनी कमेटी की ओर से ऐसे पेड़ों को काटने की अनुमति ली गई है। रही बात पेड़ों की शिफ्टिंग कराने की तो इसके लिए अभियंताओं से मशविरा किया जाएगा। इस कमेटी में डीएम नवनीत सिंह चहल भी शामिल हैं। जितने पेड़ कटेंगे उनकी तुलना में 10 गुना अधिक पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि ग्रीन कुंभ का सपना साकार हो सके।
जितने कटेंगे उससे 10 गुना अधिक पेड़ लगाकर बनाएंगे ग्रीन कुंभ: मेलाधिकारी
कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद का कहना है कि महाकुंभ की सड़क परियोजनाओं की जद में तीन हजार पेड़ चिह्नित किए गए थे, लेकिन अथक प्रयास के बाद अब सिर्फ नौ सौ ही काटे जाएंगे। इसके सापेक्ष अरैल से फाफामऊ के बीच दो लाख से अधिक पौधे लगाए जाने का निर्णय लिया गया है। जितने पेड़ कटेंगे, उससे 10 गुना अधिक लगाए जाएंगे। ताकि ग्रीन कुंभ की सोच फलीभूत हो सके। इसके लिए बड़ी संख्या में पौधे लगाए जा चुके हैं। रही बात पेड़ों की शिफ्टिंग की तो यह तकनीक सफल नहीं है। ऐसे में पेड़ों की शिफ्टिंग करना संभव नहीं हो पा रहा है।
रेलवे की ओर से शिफ्ट कराए गए 12 में से 11 पेड़ बचाए गए
पिछले वर्षों में जिले में कई पेड़ों की शिफ्टिंग कराई जा चुकी है। दारागंज, झूंसी समेत कई जगहों पर बाधा बनने वाले 12 पेड़ों की रेलवे की ओर से सफलतापूर्वक शिफ्टिंग कराई जा चुकी है। रेलवे विकास निगम के महाप्रबंधक वीके अग्रवाल का कहना है कि परेड और आसपास के इलाकों में जिन पेड़ों की शिफ्टिंग कराई गई, उनमें से 11 पेड़ बचा लिए गए और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।