इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजाद पार्क (कंपनी बाग) प्रयागराज से अतिक्रमण हटाने के फैसले का पालन करने के मामले में अधिकारियों द्वारा जवाबदेही से बचने व जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने पर नाराजगी जाहिर की है और तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि जब भी सवाल पूछा जाता है तो दस्तावेज पेश करने के लिए समय की मांग की जाती है। ऐसे में याचिका पर फैसला नहीं लिया जा सकता।
उद्यान अधीक्षक व प्रयागराज विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से किसी भी प्रकार का सहयोग न मिलने पर जिले के जिम्मेदार सभी अधिकारियों को दस्तावेज के साथ 5 अक्तूबर को पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रयागराज के मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, राजकीय उद्यान अधीक्षक, वानिकी विभाग प्रयागराज के उप निदेशक एवं प्रयागराज विकास प्राधिकरण के सचिव अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में रिकॉर्ड सहित हाजिर हों।
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने जितेन्द्र सिंह बिसेन व अन्य की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता प्रभाष पांडेय ने बहस की। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के अरुण कुमार व इलाहाबाद लेडीज क्लब केस में दिए गए निर्देश के तहत आजाद पार्क से अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने पार्क अधीक्षक से पूछा कि 1975 के पार्क सुरक्षा संबंधी कानून के पहले व लागू होने के बाद की पार्क की संपत्ति की जानकारी दें, तो उन्होंने खुद को असहाय बताया।
कहा कि अतिक्रमण हटाने के आदेश उनके पास हैं। रिपोर्ट में संपत्ति चिन्हित नहीं की गई है। पीडीए ने कहा कि वह सरकार द्वारा दी गई जमीन पर ही विकास करती है। जमीन सरकार की है। पार्क की सुरक्षा की जिम्मेदारी अधीक्षक के पास है। प्राधिकरण को क्षेत्राधिकार नहीं है। पार्क वानिकी विभाग के अधीन है। जब सरकार पीडीए को पार्क देगी तभी वह विकास करेगी। जब कोर्ट ने इसके दस्तावेज मांगे तो पेश करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा, जब सवाल पूछा जाता है तो समय मांगने से सुनवाई नहीं हो सकती। याचिका की अगली सुनवाई 5 अक्तूबर को होगी।