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कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को कोर्ट से झटका, बैंक कर्मचारी को धमकाने का मुकदमा नहीं होगा वापस

Wed, 08 Sep 2021 12:09 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

शासन के निर्देश पर अभियोजन पक्ष से जिला शासकीय अधिवक्ता गुलाबचंद्र अग्रहरि ने छह दिसंबर 2018 को वाद वापसी की अर्जी न्यायालय में दी थी। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित पक्षकार एक प्राइवेट व्यक्ति है। आरोप पत्र में लगाए गए आरोप में सात वर्ष तक की सजा हो सकती है। 
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prayagraj news : नंद गोपाल गुप्ता नंदी। - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को अदालत से झटका लगा है। स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए ने नंदी पर दर्ज बैंक मैनेजर को धमकाने का केस वापस करने से इनकार करते हुए वाद वापसी की अर्जी खारिज कर दी है। स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश आलोक कुमार श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई की।

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शासन के निर्देश पर अभियोजन पक्ष ने छह दिसंबर 2018 को वाद वापसी की अर्जी न्यायालय में प्रस्तुत की थी। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित पक्षकार एक प्राइवेट व्यक्ति है। आरोप पत्र में लगाए गए आरोप में सात वर्ष की सजा है। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत वाद वापसी प्रार्थना पत्र निरस्त किए जाने योग्य है। अदालत ने मामले में आरोप तय करने के लिए 21 सितंबर को नंदी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा है।

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क्या था मामला
नंदी के विरुद्ध केनरा बैंक के शाखा प्रबंधक संजीव राय ने थाना सिविल लाइन में एफआईआर दर्ज कराई थी कि 22 सितंबर 2012 को नंद गोपाल गुप्ता जो नंदी राम राइस मिल के प्रोपराइटर हैं, उनका लोन अकाउंट एनपीए घोषित था। बैंक ने पूरे रुपये वापस मांगे थे। उसी दिन उस खाते में जो रकम आरटीजीएस से आई थी, उसे बैंक में लोन अकाउंट में समायोजित कर दिया था। नंद गोपाल गुप्ता रुपये वापस करने के लिए दबाव डालने लगे। अपने साथ अकाउंटेंट व अन्य लोगों के साथ आकर शाखा प्रबंधक को धमकाया और नौकरी से निकलवाने की धमकी दी और फ़ोन पर गालियां व जान से  मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद नंदी और अकाउंटेंट गणेश के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की दलील थी कि इस मामले में साक्ष्य नहीं हैं और आरोपी को सजा होने की संभावना है। आरोपी जनप्रतिनिधि और सरकार में मंत्री है। वाद वापसी जनहित में है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
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