फतेहगंज पश्चिमी। बेसमेंट की नींव खोदने के दौरान पड़ोस की इमारत ढहने से हुए हादसे के मामले में पुलिस ने बेसमेंट मालिक दीपक गोयल, उसके भाई अमित गोयल और मोहल्ला अंसारी वार्ड पांच के ठेकेदार अकीक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज की है। इस हादसे में जाहिद और धर्मेंद्र की मौत हो गई थी, जबकि तीन लोग घायल हुए हैं।
कस्बे के मोहल्ला साहूकारा निवासी दीपक गोयल और अमित गोयल मुख्य बाजार में अपनी पुरानी दुकानों को तुड़वाकर दस दिनों से बेेसमेंट बनवा रहे थे। बुधवार अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे बेसमेंट की नींव खोदने का काम हो रहा था। इसी दौरान पड़ोसी व्यापारी कृष्ण अवतार गुप्ता की दो मंजिला किराना दुकान भरभराकर बेसमेंट पर गिर गई। इससे कृष्ण अवतार, उनका नौकर सक्षम और बेसमेंट में काम कर रहे इस्लामनगर निवासी शकील, मोहल्ला अंसारी निवासी जाहिद और भिटौरा निवासी धर्मेंद्र दब गए।
मौके पर पहुंची एसडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीम ने अफसरों की मौजूदगी में राहत कार्य शुरू किया। रात करीब साढ़े नौ बजे सभी लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा सका। अस्पताल ले जाने के दौरान धर्मेंद्र और जाहिद की मौत हो गई। अन्य घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बृहस्पतिवार को थाना फतेहगंज पश्चिमी में धर्मेंद्र के पिता की तहरीर पर बेसमेंट मालिक दीपक गोयल, उसका भाई अमित गोयल और ठेकेदार अकीक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। मगर अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
पड़ोसी की दीवार में भी आई दरार, बेसमेंट को बंद कराने की मांग
बेसमेंट के दूसरी ओर कैलाश अग्रवाल की दुकान और मकान है। उन्होंने बताया कि बेसमेंट की खोदाई से उनकी दीवार भी दरक रही है। दीवार और फर्श में दरार आ गई है। लिंटर गिरने की घटना न इसलिए उन्होंने लिंटर के नीचे रोक लगा दी है। उन्होंने एसडीएम और सीओ से बेेसमेंट में मिट्टी भरवाने की अनुमति मांगी है।
घटनास्थल पर तैनात रही पुलिस
बृहस्पतिवार को भी कस्बे के तमाम लोग घटनास्थल पर पहुंचते रहे। पुलिस को आशंका थी कि कहीं कोई विवाद न हो जाए। इसके कारण दर्जन भर से ज्यादा पुलिसकर्मी घटनास्थल पर तैनात रहे।
इकलौते बेटे थे मृतक, परिवार की थी जिम्मेदारी
बृहस्पतिवार दोपहर बाद धर्मेंद्र और जाहिद के शव उनके घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। धर्मेंद्र और जाहिद दोनों ही अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी उनके ही कंधों पर थी। उनकी मौत से दोनों परिवार टूट गए हैं। लोगों का कहना था कि अब उनके परिवार कैसे चलेंगे। कौन उन्हें कमाकर खिलाएगा। धर्मेंद्र के परिवार में पत्नी मंजू के अलावा माता-पिता और दो बच्चे हैं। जाहिद के परिवार में पत्नी नसरीन, माता-पिता, नौ बहनें और दो बेटियां हैं।
अंतिम संस्कार तक डटे रहे एसडीएम और सीओ
हादसे में दो लोगों की मौत को लेकर प्रशासन और पुलिस के अफसरों को माहौल खराब होने की आशंका थी। इसके चलते बृहस्पतिवार सुबह ही एसडीएम बहेड़ी राजेश चंद्र और सीओ मीरगंज सुनील राय वहां पहुंच गए। दोनों अधिकारी अंतिम संस्कार होने के बाद तक कस्बे में पुलिस चौकी पर बैठे रहे।
आर्थिक मदद दिलाने की मांग
सपा के विधानसभा अध्यक्ष, शेरगढ़ ब्लॉक प्रमुख भूपेंद्र कुर्मी और शीशगढ़ के पूर्व चैयरमैन हाजी गुड्डू ने पीड़ित परिवारों के घर जाकर उनके परिजन को ढांढस बंधाया। उन्होंने चौकी पर मौजूद एसडीएम राजेश चंद्र और सीओ सुनील राय से मुख्यमंत्री कोष से दोनों मृतकों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दिलाने की मांग की।
मानी होती पड़ोसी की राय तो न तो होता हादसा
- पिछले दस दिन से बेसमेंट बनाने का विरोध कर रहे थे कृष्ण अवतार
- हादसे के अगले दिन भी मौके पर पहुंचते रहे लोग, पुलिस ने हटाया
फतेहगंज पश्चिमी। हादसे के दूसरे दिन भी तमाम लोग घटनास्थल पर पहुंचते रहे। इस दौरान आसपास के लोगों का कहना था कि पड़ोसी व्यापारी कृष्ण अवतार गुप्ता बेसमेंट की खोदाई शुरू होने के बाद से ही इसका विरोध कर रहे थे। मगर किसी ने उनकी बात नहीं सुनी और हादसा हो गया।
अस्पताल से बृहस्पतिवार को लौटे कृष्ण अवतार के भाई श्याम सुंदर ने बताया कि उनके भाई बेसमेंट बनाने के विरोध में थे। उन्होंने दीपक और अमित से इसका विरोध भी जताया था। मगर उनकी बात नहीं सुनी गई और बेसमेंट की खोदाई का काम बदस्तूर जारी रहा। वह एक सप्ताह से कस्बे के अन्य व्यापारियों से शिकायत करके बेसमेंट का निर्माण रुकवाने को कह रहे थे। यह भी कहा कि उनकी दुकान का भवन पुराना है, किसी भी दिन हादसा हो सकता है। एक दिन तो उन्होंने बेसमेंट का काम कर रहे मजदूरों को भी भगा दिया। मगर विवाद की स्थिति बनते देखकर वह शांत होकर बैठ गए। दीपक और अमित की जिद के कारण यह हादसा हो गया। न सिर्फ उनका भवन ढह गया, बल्कि दो लोगों की मौत हो गई और तीन घायल हो गए।
व्यापारी की हालत गंभीर, दो की छुट्टी
मलबे में दबने से गंभीर रूप से घायल किराना व्यापारी कृष्ण अवतार गुप्ता की हालत गंभीर बनी हुई है। निजी अस्पताल में उनका उपचार किया जा रहा है। उनके नौकर सक्षम और एक अन्य मजदूर शकील की हालत में सुधार के बाद अस्पताल से उन्हें छुट्टी दे दी गई।
दहशत में शकील को नहीं आ रही नींद
आंखें बंद करते दिखता है मौत का मंजर
- बताया- पैरों में फंसा था जाहिद, जिंदगी बचाने की लगा रहा था गुहार
फतेहगंज पश्चिमी। हादसे में घायल शकील बृहस्पतिवार को अस्पताल से छुट्टी होकर घर पहुंच गया। मगर घटना का खौफनाक मंजर याद करके वह सिहर उठता है। उसकी स्थिति को देखकर घरवाले शुक्रवार को उसे अस्पताल में दोबारा भर्ती कराने की तैयारी कर रहे हैं।
शकील ने बताया कि बेसमेंट में नींव खोदाई के साथ ही पिलर भरने का काम चल रहा था। धर्मेंद्र और जाहिद कोने में पिलर बना रहे थे। वह मसाला दे रहा था और बाहर से डालचंद उसे मसाला पकड़ा रहा था। इसी बीच डालचंद ने आवाज दी कि मकान गिर रहा है लेकिन वे लोग कुछ समझ पाते बिल्डिंग उनके ऊपर गिर पड़ी। जाहिद बाहर निकलने को बेसमेंट के कोने से भागा लेकिन उसके पैरों के बीच आकर गिर गया। उसके ऊपर से शटरिंग में लगने वाली लोहे की चादर आ गई और मलबा उसमें भरने लगा। वह कमर तक मलबे में दबकर कुर्सी पर बैठने जैसे स्थिति में आ गया। बायां हाथ और पैर मलबे में पूरी तरह दब गए। दाहिनी हाथ बाहर रह गया, जिससे उसने जेब से मोबाइल निकालकर लोगों को फोन करना शुरू किया। उसके पैरों में फंसा जाहिद बार-बार खुद को बचाने की गुहार लगा रहा था लेकिन वह मजबूर था। करीब घंटे भर बाद जाहिद बेसुध हो गया तो उसका खौफ और ज्यादा बढ़ गया। अंदर उसका भी दम घुटने लगा था। मगर बाहर से लोग फोन पर बात करके उसकी हिम्मत बढ़ा रहे थे। बाहर निकालने के दौरान वह भी बेहोश हो गया। मगर अस्पताल पहुंचने के बाद होश आया तो उसके बाद वह सोने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। आंखें बंद करते ही हादसे का खौफनाक मंजर आंखों में तैर जाता है। जाहिद की चीखें सुनाई देती हैं। फिर देर रात घरवालों ने उसे नींद की दवाई देकर सुलाया।