सीटी स्कैन से पता चला कि बीमारी लीवर में भी फैल गई है। इसके बाद बच्चे की सर्जरी करके ट्यूमर को निकाला गया और रक्त स्राव को रोका गया। इसमें मल का रास्ता इलियोस्टोमी द्वारा पेट में ऊपर से बनाया गया। इसके उपरांत बच्चे को लीवर में फैले ट्यूमर को रोकने के लिए तीन महीने तक कीमो थेरेपी दी गई। कीमो के असर से बीमारी रुक तो गई पर पूरी तरह से लीवर ठीक नहीं हुआ।
फिर कैंसर सर्जन डॉक्टर राजुल अभिषेक और डॉक्टर आशीष पांडे की टीम ने दोबारा ऑपरेशन करके लीवर में फैले ट्यूमर को निकालने का फैसला लिया। मरीज के परिजनों ने तत्काल खून की व्यवस्था की और ऑपरेशन की सहमति दी। डॉक्टरों ने 23 जून को सफल ऑपरेशन करके लीवर में फैले ट्यूमर को भी निकाल दिया। वहीं, मल के रास्ते को दोबारा प्राकृतिक रूप से जोड़ दिया। अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ्य है। 30 जून को मरीज गीत नागर को डिस्चार्ज कर दिया गया।
यह बहुत ही जटिल सर्जरी थी, जिसमें लीवर में फैली बीमारी का समय रहते इलाज करना भी मुश्किल था। कैंसर सर्जन डॉ. राजुल अभिषेक, सीनियर रेजिडेंट डॉ. आशीष पांडे, डॉ. प्रदीप सिंह और डॉ. केसी की टीम ने चार घंटे से अधिक समय तक सर्जरी करके बच्चे के ट्यूमर को बाहर निकालने में सफलता हासिल की। - डॉ. आशीष पांडेय, सीनियर रेजिडेंट, सर्जिकल ऑनकोलॉजी, एसआरएन