विवेचना के बाद अदालत में प्रस्तुत आरोप पत्र के आधार पर ट्रायल चला। इस दौरान कुल दस गवाहों को पेश किया गया, जिसके बाद जिला जज की अदालत ने चारों को आजीवन कारावास के साथ प्रत्येक को 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ चारों दाषियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अपीलार्थियों के अधिवक्ता ने चिकित्सक के बयान पर भरोसा जताते हुए तर्क दिया कि बुजुर्ग की हत्या नहीं हुई थी, बल्कि फर्श पर गिरने से उन्हें चोट आई थी। इस वजह से वह कोमा में चले गए थे। इसकी वजह से उनकी मौत हुई है। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए चारों आरोपियों की जमानत मंजूर करते हुए मिली अर्थदंड की आधी राशि पर रोक लगा दी है। शेष राशि छह माह मेें अदा करनी होगी।