मेले में शासन और प्रशासन की विफलता
संत इसके लिए फंड इकट्ठा करेंगे और मेले की व्यवस्था के लिए प्रशासन को सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि जब अर्ध कुंभ को कुंभ का दर्जा दिया जा सकता है, तो संत समाज ये मानता रहा है कि माघ मेले का स्वरूप भी इतना छोटा नहीं होगा। लेकिन, जिस तरह की अव्यवस्था मेले में देखने को मिल रही है, उसे शासन -प्रशासन की विफलता ही कहा जाएगा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेले के समय गंगा में जलराशि छोड़े जाने के लिए भी मेला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि गंगा पर सरकारों ने बांध बनाकर नियंत्रण कर रखा है। माघ मेले के समय अनिश्चित प्रवाह से संतों-कल्पवासियों के शिविरों में पानी भर रहा है। इससे साधु-संतों और कल्पवासियों को परेशानी हो रही है। वहीं कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हमला बोला।
उन्होंने कहा कि मेला प्रशासन की ओर से ओमिक्रॉन संकट को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्हें यह बताना चाहिए कि आखिर ओमिक्रॉन का खतरा है भी या नहीं है। मेला क्षेत्र में कोरोना के खतरे के नाम पर मास्क न पहनने पर हजारों का चालान किया जा रहा है।
योगी पर कसा तंज, बोले-सीएम का धर्मनिरपेक्ष होना जरूरी
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी घेरा। उन्होंने कहा कि एक संत मुख्यमंत्री नहीं हो सकता। इसलिए कि जब कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर दायित्व संभालता है तो उसे धर्मनिरपेक्षता की शपथ लेनी पड़ती है। ऐसे में कोई धार्मिक व्यक्ति ऐसा पद कैसे संभाल सकता है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज के सवाल पर कहा कि एक व्यक्ति एक साथ दो शपथ नहीं ले सकता। एक संत, महंत या पीठाधीश्वर तो हो सकता है, लेकिन वह मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं हो सकता।