नवाबगंज निवासी एकलाख वह शख्स है, जिसने 2002 में अतीक अहमद पर कचहरी परिसर में बम से हमला किया। इस हमले में अतीक बाल-बाल बच गया था। हाल ही में जेल से रिहा हुए एकलाख ने अतीक के आतंक के बारे में बताया।
माफिया अतीक अहमद का आतंक बाहर ही नहीं, बल्कि जेल की चहारदिवारी के भीतर भी था। वह अपने दुश्मनों को जेल के भीतर ही खत्म कराने की साजिश भी रचता रहता था। यह खुलासा 24 साल बाद जेल से रिहा हुए उसके जानी दुश्मन एकलाख ने किया है। उसने बताया कि भरी कचहरी में उसके भाई को गोलियों से भूनने के बाद भी सुकून नहीं मिलने पर अतीक ने उसे जेल के भीतर जहर दिलवाकर मारने की कोशिश की।
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नवाबगंज निवासी एकलाख वह शख्स है, जिसने 2002 में अतीक अहमद पर कचहरी परिसर में बम से हमला किया। इस हमले में अतीक बाल-बाल बच गया था। हाल ही में जेल से रिहा हुए एकलाख ने अतीक के आतंक के बारे में बताया। कहा कि चार अप्रैल 1995 को उसके भाई अख्तर हुसैन को अतीक ने भरी कचहरी गोलियों से भुनवा दिया था। उसका भाई चांदबाबा के साथ रहता था और इसी रंजिश में उसने यह हत्याकांड अंजाम दिलाया।
सीबीआई ने इसमें अतीक समेत 14 पर चार्जशीट दाखिल की। हालांकि बाद में अतीक कोर्ट से बरी हो गया। एकलाख ने बताया कि भाई की हत्या का बदला लेने के लिए ही उसने सात अगस्त 2003 में अतीक पर कचहरी परिसर में बम से हमला किया था। हत्या के प्रयास के मामले में ही उसे उम्रकैद हुई। उसका आरोप है कि माफिया का आतंक इस कदर था कि उसने जेल के भीतर भी उसे जहर देकर मरवाने की साजिश रची। इससे उसकी हालत बिगड़ गई और फिर कई महीनों तक चले इलाज के बाद वह बच पाया।