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एनजीओ की आड़ में करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने वाला गिरफ्तार, तीन राज्यों में दर्ज हैं मुकदमे

Fri, 20 Aug 2021 08:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

धूमनगंज पुलिस ने तीन राज्यों में करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने वाले 25 हजार के इनामी बल्लभ पांडेय (35) को गिरफ्तार कर लिया है। उसने बच्चों की शिक्षा के नाम पर लोगों को झांसा देकर करोड़ों रुपये जमा कराए और फिर रकम समेटकर भाग निकला।
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Prayagraj News : करोड़ों के फर्जीवाड़े में गिरफ्तार बल्लभ पांडेय। - फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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धूमनगंज पुलिस ने तीन राज्यों में करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने वाले 25 हजार के इनामी बल्लभ पांडेय (35) को गिरफ्तार कर लिया है। उसने बच्चों की शिक्षा के नाम पर लोगों को झांसा देकर करोड़ों रुपये जमा कराए और फिर रकम समेटकर भाग निकला। उसके खिलाफ उप्र के अलावा छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी मुकदमे दर्ज हैं।
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पुलिस ने बताया कि आरोपी बल्लभ पुत्र गिरीश पांडेय मूल रूप से अंतू, प्रतापगढ़ का रहने वाला है जो शहर में अल्लापुर में रहता है। 2016 में उसके खिलाफ जबलपुर की रहने वाली पूनम सौधिया ने धूमनगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि उसने मप्र के विभिन्न जिलों में परम पारस ग्राम विकास कृषि शिक्षा बेरोजगार कल्याण फाउंडेशन एनजीओ का कार्यालय खोला। वह खुद को संस्था का सचिव बताता था।

उसने पिछड़े इलाकों में बच्चों को अतिरिक्त शिक्षा दिलाने के नाम पर प्रत्येक के लिए अभिभावकों से 52 रुपये वसूल किए। इस तरह करोड़ों रुपये जमा होेने के बाद वह रकम समेटकर भाग निकला। आरोप यह भी है कि उसने एनजीओ के लिए काम करने वाले शिक्षकों का वेतन, कार्यालय का किराया भी नहीं दिया। धूमनगंज में मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही वह फरार चल रहा था।
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इसके बाद उसने छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी इसी तरह ठगी को अंजाम दिया। जिसमें उसके खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत हुआ। फरारी के दौरान जिला पुलिस की ओर से उस पर 25 हजार का इनाम भी घोषित किया गया। धूमनगंज इंस्पेक्टर ने बताया कि मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर उसे झलवा मार्ग रेलवे डॉट पुल के पास से गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ महाराष्ट्र में दो, छत्तीसगढ़-मेरठ में भी एक-एक मुकदमे दर्ज हैं।

शिक्षकों को स्थायी नौकरी का देता था झांसा
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी एनजीओ को सरकार से सहायता प्राप्त बताता था। यही नहीं बच्चों को पढ़ाने के लिए संस्था से जुड़ने वाले शिक्षकों को झांसा देता था कि कुछ समय बाद उन्हें स्थायी शिक्षक की नौकरी दिला देगा। केवल मध्य प्रदेश में ही उसने तीन हजार से ज्यादा अध्यापन केंद्र बनवाए थे जिनसे लाखों रुपये की वसूली की थी। 
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