केस-एक : टैगोर टाउन निवासी 68 वर्षीय राम किशोर (परिवर्तित नाम) लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त हैं। उनकी पत्नी का देहांत काफी पहले हो गया था। वह अपने इकलौते बेटे और बहु के साथ रहते हैं। उनकी बहु उन्हें समय पर खाना देने के साथ ही उनका ख्याल भी रखती थी, लेकिन वह रोज अपने बेटे से शिकायत करते थे कि बहु उन्हें खाना नहीं देती है। एक दिन उनके बेटे और बहु में इस बात को लेकर इतना झगड़ा हो गया कि बात अलग रहने तक पहुंच गई। हालांकि, एक दोस्त की सलाह पर राम किशोर का बेटा उन्हें कॉल्विन अस्पताल के मन कक्ष में लेकर पहुंचा, जहां काउंसलिंग के दौरान पता चला कि राम किशोर को एल्जाइमर्स बीमारी है।
केस-दो : एजी ऑफिस से सेवानिवृत्त और मम्फोर्डगंज निवासी 72 वर्षीय एक वृद्ध को कभी कभार भूलने की आदत थी। शुरुआत में परिवार के किसी सदस्य ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वहीं, एक दिन जब वह घर के बाहर गार्डन में टहलने निकले तो अपने ही बेटे को नमस्ते करने लगे। इसके अलावा उन्होंने अपने बेटे से पूछा कि उनका नाम क्या है और वह कहां रहते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने घर के बाकी सदस्यों को भी पहचानने से इन्कार कर दिया। इलाज के दौरान पता चला की उन्हें एल्जाइमर्स की बीमारी हो गई है।
केस-तीन : शंकरगढ़ निवासी 70 वर्षीय वृद्ध का परिवार दिल्ली में रहता था और वह यहां अकेले थे। एक दिन उन्हें ऐसा लगा कि यह घर उनका नहीं है और वह गलत पते पर हैं। उन्होंने आसपास के लोगों से पूछना शुरू कर दिया कि यह किसका घर है। इसके बाद मोहल्ले वालों ने इसकी सूचना उनके परिजनों को दी और वृद्ध को उनके घर में बंद कर दिया, ताकि वे कहीं चले न जाएं। इसके बाद रात के समय वह साड़ी के सहारे छत से नीचे उतरने लगे। इस दौरान उनका हाथ फिसल गया और वह एक मंजिल से नीचे गिर गए, जिससे उनके पैर की हड्डी टूट गई। वहीं, इलाज में पाया गया कि अकेलेपन के कारण वह एल्जाइमर्स के शिकार हो गए हैं।
अगर वृद्ध को अकेला छोड़ेंगे तो उनमें एल्जाइमर्स होने का खतरा अधिक रहता है। बच्चों की तरह बुजुर्गों का मन भी किसी न किसी चीज में लगा रहना चाहिए। वर्तमान में एकाकी परिवार होने के कारण इस प्रकार के मामले बढ़े हैं। - डॉ. राकेश पासवान, मनोचिकित्सक, कॉल्विन हॉस्पिटल