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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : चार सौ पन्नों में सिमटी हॉलैंड हाल की एक सदी

Thu, 11 Nov 2021 10:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज
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Prayagraj News : इविवि हालैंड हॉल छात्रावास में आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन करते अतिथिगण। - फोटो : प्रयागराज
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हॉलैंड हाल: सदियों के वातायन से’। हॉस्टल की स्मृतियों को समेटे यह पुस्तक एक सदी की कई कहानियां बयां करती है, जिसे हॉस्टल के ही 56 पुरा छात्रों ने मिलकर लिखा है। लेखकों में ज्यादातर रिटायर हो चुके आईएफएस, आईएएस और आईपीएस अफसर हैं। बृहस्पतिवार को पुरा छात्रों की मौजूदगी में कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने इस पुस्तक का विमोचन किया। 
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इस पुस्तक में हॉस्टल के पुरा छात्रों से जुड़े 90 वर्षो के अनुभव का इतिहास शामिल है। 400 पन्नों की इस किताब में एक छात्र जीवन से लेकर उसकी सफलता के सफर, उसके संघर्षों और जीवन से जुड़ी खट्टी-मीटी यादों का संग्रह है। लंबे समय बाद पुरा छात्र हॉस्टल पहुंचे तो वहां की दुर्दशा देखकर चिंतित नजर आए। पुरा छात्र सुधीर सिंह ने कुलपति के समक्ष हॉस्टल के नवीनीकरण का प्रस्ताव रखा तो कुलपति से उन्हें सकारात्मक आश्वासन मिला।

कुलपति ने हॉलैंड हाल के पुरा छात्रों की ओर से किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करते हुए कहा कि अगर हॉस्टल का प्रबंध तंत्र सहयोग करेगा तो हम इसके पुनरुद्धार से पीछे नहीं हटेंगे। कार्यक्रम के दो सत्र इविवि के गेस्ट हाउस में आयोजित किए गए और शाम को हॉलैंड हाल हॉस्टल परिसर में जूनियर्स ने पुरा छात्रों का स्वागत किया।
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हॉस्टल के पुरा छात्र एवं उत्तराखंड से प्रमुख सचिव पद से रिटायर हुए नृप सिंह नपलच्याल ने कहा कि हम केवल पुराने दिनों को याद करने के लिए इलाहाबाद नहीं आए, बल्कि हॉलैंड हाल के उस सर्व समावेशी चरित्र के बारे में नई पीढ़ी को बताने और उसमें योगदान करने के लिए हॉलैंड हाल आए हैं। कार्यक्रम में राजदूत रहे पूर्व आईएफएस अफसर वीबी सोनी, आईएएस अफसर चंद्र सिंह, आईएएस अफसर हरीश चंद्रा, आईएएस अफसर मधुकर द्विवेदी, आईपीएस शांतनु मुखर्जी, आईपीएस शैलेंद्र प्रताप सिंह, आईपीएस एम. सुशील कुमार आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों का संचालन बुद्धिसागर दुबे एवं प्रो. मुश्ताक अली ने किया। स्वागत रंजीत सिंह ने किया।

डॉ. वर्मा पद्मविभूषण से ऊपर रखते हॉलैंड मेडल
पुस्तक ‘हॉलैंड हाल: सदियों के वातायन से’ में 56 पुरा छात्रों के लेख हैं। साहित्यकार डॉ. राम कुमार वर्मा भी वर्ष 1924 से 1926 तक इसी हॉस्टल में रहकर पढ़े। इस पुस्तक में उनके बेटी राज लक्ष्मी वर्मा का लेख प्रकाशित हुआ है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि डॉ. राम कुमार वर्मा को हॉलैंड मेडल मिला था और बाद में पद्मविभूषण से सम्मानित किए गए। वह हॉलैंड मेडल हमेशा पद्मविभूषण से ऊपर रखा करते थे।

एलुमिनी एसोसिएशन के लिए समिति का गठन
हॉस्टल की दुदर्शा को देखते हुए पुरा छात्रों ने तय किया कि जल्द ही एक एलुमिनी एसोसिएशन का गठन किया जाए और पुरा छात्रों के सहयोग से हॉस्टल में दशा सुधारी जाए। कार्यक्रम में औपचारिक रूप से एलुमिनी एसोसिएशन बनाने के लिए 16 सदस्यों की समिति का  गठन किया गया, जिसमें बुद्धिसागर दुबे संयोजक एवं सुधीर सिंह सह संयोजक बनाए गए।
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