कानपुर रोड़ से जुड़ी कॉलोनियों में अतिक्रमण और सड़कों के मुहाने चौड़ा करने के मामले में विभागीय स्तर के विवाद को सुलझाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। कमेटी कमिश्नर प्रयागराज मंडल की अध्यक्षता में बनाई गई है। इसमें प्रयागराज विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, नगर आयुक्त और रक्षा संपदा विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी सदस्य होंगे।
कोर्ट ने कमेटी को 14 नवंबर से पहले बैठक कर विभागीय विवाद सुलझाने का निर्देश दिया है ताकि अतिक्रमण हटाने और सड़कों को चौड़ा करने का रास्ता साफ हो सके। आदेश कुमार की अवमानना याचिका पर न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया सुनवाई कर रहे हैं।
अवमानना याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने कोविड मामले की सुनवाई के दौरान याची की अर्जी पर कानपुर रोड से जुड़ी कॉलोनियों से अतिक्रमण हटाने और सड़कों व गलियों के मुहाने चौड़े करने का निर्देश दिया था। जो कि तमाम निर्माणों के कारण बेहद संकरी हो गई हैं। इसके अलावा पीडीए को एयरपोर्ट तक एक डेडीकेटेड कॉरिडोर का रोड मैप भी पेश करना था। 22 जनवरी 2021 के आदेश का आज तक पालन नहीं किया गया। हर बार सुनवाई में पीड़ीए और संबंधित विभागों की ओर से समय की मांग की जाती है।
पीडीए के अधिवक्ता का कहना था कि सुलेमसराय से सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन तक की सड़क से अतिक्रमण पीडीए को हटाना है, मगर सड़कों का निर्माण नगर निगम को करना है। दोनों विभागों के बीच वैचारिक मतभेद के कारण यह काम नहीं हो पाया है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि इस क्षेत्र में कैैंट बोर्ड द्वारा भी कुछ निर्माण किए गए हैं। इसकी वजह से सड़कों के मुहाने संकरे हो गए हैं। कोर्ट ने कैंट बोर्ड और रक्षा संपदा विभाग को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी को मामले में न्यायमित्र नियुक्त करते हुए उनको भी बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 14 नवंबर से पहले बैठक कर विभाग मतभेद सुलझा लें ताकि अदालत के आदेश का पालन हो सके। साथ कमेटी आम लोगों को हो रही समस्याओं को ध्यान में रखकर निर्णय ले। लोगों को जाम के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगली सुनवाई पर पीडीए सचिव और उपाध्यक्ष को अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया है।