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Allahabad University : पूरब के ऑक्सफोर्ड के नाम 65 पेटेंट, पांच हजार से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रकाशित

Mon, 23 Sep 2024 06:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 33 विभागों में 353 शिक्षकों और 375 गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति से मानव संसाधन की कमी काफी हद तक पूरी हो गई है। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार हुआ है। नतीजा कि कई वर्षों से एनआईआरएफ रैंकिंग में जगह बना पाने से वंचित रह जा रहे इविवि ने इस बार की रैंकिंग में मैनेजमेंट और बीटेक कैटेगरी में अपनी जगह बना पाने में कामयाबी हासिल की है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) 23 सितंबर को अपना 138वां स्थापना दिवस मना रहा है। इसी दिन 1887 में विश्वविद्यालय ने अधिकृत रूप से अपना सफर शुरू किया था। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) से पढ़कर निकलने वाले छात्र को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में सीधे प्रवेश मिलता था। यही वजह रही कि इविवि को ‘पूरब के ऑक्सफोर्ड’ का दर्जा मिला।

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किराये के एक कमरे से शुरू हुए 138 साल पुराने इस विश्वविद्यालय ने अपने लंबे सफर में बहुत कुछ पाया और गंवाया भी। कई दशकों बाद विश्वविद्यालय फिर कुछ पाने के लिए आगे बढ़ा है। इसका नतीजा है कि पांच साल में इविवि के नाम 65 पेटेंट दर्ज हुए हैं तो पांच हजार से ज्यादा रिसर्च पेपर भी प्रकाशित हुए हैं। वहीं, 1500 से ज्यादा बुक चैप्टर छपे हैं और विश्वविद्यालय को पिछले पांच वर्षों में तकरीबन 100 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट मिले हैं।
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इविवि के 19 शिक्षकों के नाम दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में

इस साल विश्वविद्यालय के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि आई है। दुनिया के शीर्ष दो फीसदी वैज्ञानिकों में इविवि के 19 शिक्षकों को भी शामिल किया गया है। यह सब संभव हुआ विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति होने के कारण। शिक्षकों की नियुक्ति होने से शोध की संख्या बढ़ी है, जिससे पेटेंट तेजी से हो रहे हैं और रिसर्च पेपरों के प्रकाशित होने की गति भी तेज हुई है। ये उपलब्धियां भविष्य में विश्वविद्यालय को शीर्ष पर ले जाने में सहायक होंगी।

विश्वविद्यालय के 33 विभागों में 353 शिक्षकों और 375 गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति से मानव संसाधन की कमी काफी हद तक पूरी हो गई है। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार हुआ है। नतीजा कि कई वर्षों से एनआईआरएफ रैंकिंग में जगह बना पाने से वंचित रह जा रहे इविवि ने इस बार की रैंकिंग में मैनेजमेंट और बीटेक कैटेगरी में अपनी जगह बना पाने में कामयाबी हासिल की है।

इस वर्ष शुरू होंगे तीन नए हॉस्टल

इविवि के तीन नए हॉस्टलों का संचालन इस वर्ष से शुरू कर दिया जाएगा। इनमें महिला और एक पुरुष छात्रावास है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय छात्रावास का संचालन भी शुरू होने जा रहा है। इसके अलावा हिंदू हॉस्टल भी नए रंग-रूप में तैयार हो गया है, जिसमें छात्रों को इसी सत्र से प्रवेश दिए जाएंगे। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की ओर से छात्राओं और शिक्षकों की सुविधा के लिए इसी सत्र से दो नई बसों का संचालन भी शुरू किया गया है।

जल्द पूरा होगा दो हजार सीटों वाले ऑडिटोरियम का निर्माण

इविवि के विज्ञान संकाय में दो हजार सीटों वाले एक विशाल ऑडिटोरियम का निर्माण कार्य चल रहा है, जो जल्द ही पूरा होगा। साथ ही संरचनात्मक रूप से विस्तार के लिए केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की इमारत और लेक्चर थियेटर कॉम्पलेक्स शीघ्र ही तैयार हो जाएंगे। कला संकाय में सेंट्रल लाइब्रेरी की एक्सटेंशन बिल्डिंग का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है। शिक्षकों के आवास की सुविधा को बढ़ाते हुए बेली कॉलोनी में नए आवास बनाए गए और आवंटन किया गया।

पांच दशक बाद बदलाव की बयार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थिति 70 के दशक से बिगड़ने लगी, जब 1973 में इसे पूरी तरह से राज्य सरकार के अधीन कर दिया गया। कुलपतियों की नियुक्ति परोक्ष रूप से सरकार के हाथ में चली गई और विश्वविद्यालय का राजनीतिकरण होने लगा। शिक्षकों की नियुक्ति में जाति और रिश्तेदारी देखी जाने लगी। वर्ष 2005 में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद हालात और तेजी से बिगड़े। पांच साल पहले तक विश्वविद्यालय में शिक्षकों के छह सौ पद खाली थे और पिछले कुलपति नियुक्तियां नहीं कर सके। अब पांच साल बाद बदलाव की बयार दिख रही है। बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति होने से विश्वविद्यालय के लिए भविष्य के रास्ते खुले हैं।
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विश्वविद्यालय ने देश को दिए गई दिग्गज

इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने हर क्षेत्र में देश को कई दिग्गज दिए। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर एवं वीपी सिंह और पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा इविवि के ही छात्र रहे। यूपी के पूर्व मुख्य मंत्री एनडी तिवारी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना, कोठारी आयोग के चेयरमैन रहे एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रो. डीएस कोठारी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुभाष कश्यप, पूर्व सीएजी टीएन चतुर्वेदी और ढेर सारे बड़े नामों की इविवि के पुरा छात्रों में गिनती होती है।

हमारा प्रयास है कि विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय खेलों को बढ़ावा मिले। विश्वविद्यालय ने हाल ही में जारी हुई रैंकिंग में मैनेजमेंट और बीटेक की कैटेगरी में स्थान प्राप्त करते हुए उल्लेखनीय प्रगति की है। विश्वविद्यालय की नैक ग्रेडिंग की भी प्रक्रिया चल रही है और हमें विश्वास है कि हम A++ की सर्वोच्च ग्रेडिंग प्राप्त करेंगे। आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय की ग्रेडिंग और रेटिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन होगा। विश्वविद्यालय के 138वें स्थापना दिवस की विश्वविद्यालय के पूरे परिवार और साथ ही विश्वविद्यालय से बहुत गहराई से जुड़े हुए हमारे सभी नगरवासियों को मेरी तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं। - प्रो. संगीता श्रीवास्तव, कुलपति, इविवि
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