शिक्षा की गुणवत्ता हो रही प्रभावित
कुछ महाविद्यालयों में अधिकतम दो या तीन शिक्षक हैं। उन्हें स्नातक की पढ़ाई भी करानी है। अतिरिक्त कार्य के मद्देनजर वे नियमित रूप से पीजी या यूजी की क्लास नहीं ले पा रहे और इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इन्हीं कारणों से पीजी के 15 पाठ्यक्रम नए सत्र से बंद करने का निर्णय लिया गया है,लेकिन इन विषयों में शिक्षकों को पीएचडी कराने का मौका मिलेगा।
पीजी के जिन विषयों में विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम है, उर्दू, अरबी, फारसी, संस्कृत, दर्शनशास्त्र जैसे विषयों की हालत सबसे खराब है। सूत्रों का कहना है कि संघटक महाविद्यालयों में मनोविज्ञान, शिक्षाशास्त्र और प्राचीन इतिहास जैसे विषयों की हालत भी अच्छी नहीं है। अगर कॉलेज भविष्य में इन विषयों में न्यूनतम प्रवेश लेने की स्थिति में होंगे तो इन विषयों की वापसी हो सकती है।