इलाहाबाद हाईकोर्ट में धर्मांतरण कानून को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं की सुनवाई 22 अक्तूबर को होगी। मंगलवार को इस मामले में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम एन भंडारी व जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि धर्मांतरण क़ानून के ख़िलाफ दाखिल सभी अर्जियों पर एक साथ 22 अक्तूबर को बतौर फ्रेश केस सुनवाई होगी।
सौरभ कुमार की तरफ से दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यूपी सरकार के वकील से याचिकाकर्ता को जवाब की कॉपी देने को कहा। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा था।
जनहित याचिका में धर्मांतरण कानून को संविधान विरोधी और गैरजरूरी बताया गया है और कहा गया है कि यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। इसका सियासी दुरुपयोग किए जाने की भी आशंका है।